अमेरिकी फैसले से मुरादाबाद का पीतल उद्योग संकट में

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चार हजार करोड़ का निर्यात बाधित होने की आशंका जताई जा रही है.
भारत से अमेरिका ने तरजीह व्यापार का दर्जा छीन लिया है। इसकी सीधी मार मुरादाबाद के हस्तशिल्प पर पड़ेगी। यहां से अमेरिका को प्रतिवर्ष चार हजार करोड़ रुपए का पीतल हस्तशिल्प उत्पाद निर्यात होता है। ये उत्पाद जीएसपी में शामिल थे। जीएसपी समाप्त होने से इन उत्पादों पर 15 फीसदी शुल्क लगेगा। इससे अमेरिका के बाजार में इन उत्पादों की कीमतें बढ़ जायेंगी। मूल्य प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने के कारण कारोबार प्रभावित होना लाजिमी है। ऐसे में बड़े पैमाने पर मिले कारोबारी आर्डर रद्द होने का खतरा उत्पन्न हो गया है।

मुरादाबाद की सबसे बड़ी एक्सपोर्ट कंपनी के स्वामी अजय गुप्ता के मुताबिक उनका तमाम निर्यात अमेरिका में होता है। अमेरिका द्वारा विशेष तरजीह का दर्जा भारत से छीना जाने से अमेरिकी बाजार में भारतीयों का टिका रह पाना मुश्किल हो जाएगा।

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हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद के महानिदेशक राकेश कुमार का कहना है कि देश के कुल 1500 करोड़ के निर्यात का लगभग आधा यानी 12000 करोड़ अकेले अमेरिका को निर्यात होता है। हमारे प्रतिद्वंदी देशों, वियतनाम, इंडोनेशिया तथा बांग्लादेश आदि को जीएसपी छूट हासिल है। हमारी छूट खत्म होने से हमारे निर्यातकों का अमेरिकी बाजार में ठहरना मुश्किल हो जाएगा।

मुरादाबाद की हैंडीक्राफ्ट इंडस्ट्रीज 8000 करोड़ रुपए सालाना निर्यात करता है जिसका आधा यानी 4000 करोड़ रुपए का निर्यात अकेले अमेरिका को किया जाता है। जीएसपी से बाहर होने पर मुरादाबाद को बड़ा झटका लगा है।

-टाइम्स न्यूज़ मुरादाबाद.

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