प्रधानमंत्री जन औषधि योजना की सस्ती दवायें सेहत के लिए खतरनाक

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न जाने कितने लोग जानकारी के अभाव में ऐसी दवायें खरीदकर खतरा मोल ले रहे होंगे?
प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत सस्ते दामों पर उपलब्ध करायी जा रही दवायें मानक पर खरी नहीं उतर रहीं। ऐसी दवायें जीवन रक्षक के बजाय स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकती हैं। केन्द्र सरकार को इस सस्ती दवा योजना को लागू करने वाले ब्यूरो ऑफ पीएसयूज ऑफ इंडिया (बीपीपीआई) ने जनवरी 2018 से अब तक इन दवाओं की जांच की तो 18 कंपनियों के 25 बैच अधोमानक पाए गए। इससे इन सस्ती दवाओं पर भरोसा किया जाना खतरे से खाली नहीं है। केन्द्र ने 146 कंपनियों से सस्ती दवायें खरीदने का करार किया है जिनमें अभी तक कुछ ही कंपनियों के कुछ बैचों की जांच की गयी है।

जांच में एएमआर फार्मा इंडिया की मधुमेहरोधी बेगिलबोस तथा हाइपरटेंशन की टेलमीसार्टन  दवाओं का एक बैच, नवकेतन फार्मा की निमोसुलाइड और नेस्टर फार्मा की पैरासिटामोल मानक के खिलाफ पायी गयी। हेनुकेम लेबोरेट्रीज की एंटीबायोटिक सिप्रोफ्लोक्सेसिन व ओएमेड फार्मूलेशन की हाइपरटेंशन के लिए एनालैप्रिल दवा का बैच भी अधोमानक पाया गया।

मॉर्डन लेबोरेट्रीज, रावियन लाइफ साइंस, मैक्स केम फार्मास्युटिक्लस और थियॉन फार्मा की दवायें भी मानकों पर खरी नहीं उतरीं, आइडीपीएल की पैंटाप्रोजोल का एक भी बैच मानक पर खरा नहीं उतरा। बायोजेनेटिक्स ड्रग्स, विंग्स बायोटेक, जेनिथ ड्रग्स और क्वालिटी फार्मा की दवायें भी गलत पायी गयीं।

केन्द्र सरकार ने ऐसी 146 कंपनियों से सस्ती दवायें खरीदने का करार किया था ताकि लोगों के महंगी दवाओं से निजात मिल सके लेकिन कंपनियों ने तय मानकों का उल्लंघन कर सरकार की जनहितैषी योजना को जनविरोधी योजना में बदल दिया।

जांच होने तक जन औषधि केन्द्रों पर बिक्री बंद हो

चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है कि मानकों को किनारे कर जो दवाईयां बेची जाती हैं, वे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हैं तथा उनसे रोगी को दीर्घकालीक खतरे हो सकते हैं। दर्द निवारक, मधुमेह तथा उच्च रक्तचाप की दवायें मानकों के उल्लंघन पर और भी खतरनाक हो सकती हैं। जो दवायें जन औषधि केन्द्रों को उपलब्ध करायी जा रही हैं, उनमें ऐसे ही रोगों की दवायें अधोमानक पायी गयी हैं। जिन लोगों ने इन दवाओं का सेवन किया होगा उन्हें इन दवाओं के दुष्प्रभावों के परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं। बीपीआइ को उन सभी कंपनियों की सभी दवाओं की जांच करनी चाहिए जो जन औषधि केन्द्रों को भेज रही हैं। जांच पूरी होने तक सभी केन्द्रों को सील कर दवाओं की बिक्री प्रतिबंधित की जानी चाहिए। न जाने कितने लोग जानकारी के अभाव में ऐसी दवायें   खरीदकर खतरा मोल ले रहे होंगे?

सात कंपनियां काली सूची में

लीजेन हेल्थकेयर, एएमआर फार्मा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, ओवरसीज हेल्थ केयर, हनुकेम लैबोरेट्रीज, जैकसन लैबोरेट्रीज, मस्कट हेल्थ सीरीज और टैरेस फार्मास्युटिकल्स को दो साल के लिए काली सूची में डाला गया है। बीपीपीआइ की जांच सूची के बाद घटिया दवायें बनाने वाली इन कंपनियों को ब्लैक लिस्ट किया है।

-टाइम्स न्यूज़ नई दिल्ली/गजरौला.

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