कई बीमारियों का शिकार सलेमपुर का स्वास्थ्य केन्द्र

salempur-government-hospital-gajraula
ग्राम प्रधान के दावों के बावजूद अपेक्षित विकास का मोहताज सलेमपुर गोसाईं.
विकास खंड कार्यालय से मात्र दो किलोमीटर दूर स्थित गांव सलेमपुर गोसाईं अनेक सरकारी व्यवस्थाओं के बावजूद विकास नहीं कर पाया। लगभग नौ हजार की आबादी के इस गांव के कई मोहल्लों की नालियों का गंदा पानी गांव की स्वच्छता की पोल खोलता है।

नागा गद्दी के नाम पर बसे इस गांव को एक गोस्वामी परिवार द्वारा बसाया बताया जाता है। इस परिवार को अंग्रेजी शासनकाल में 21 अन्य गांवों की जागीर प्रदान की गयी थी। उस परिवार के एक मुखिया देवेन्द्रबन गोस्वामी ने सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र के लिए लगभग पांच एकड़ (तीस बीघा) भूमि प्रदान की थी। जहां आजाद भारत की सरकार ने अस्पताल तथा उसके स्टाफ के लिए शानदार आवासीय भवन भी बनवाए। पेयजलापूर्ति के लिए ओवर हैड टैंक भी बनाया गया। बंद पड़े इस ओवर हैड टैंक का ट्यूब वैल कभी चला भी या नहीं इसका कोई प्रमाण नहीं।

salempur-gusain-hospital-doctors

स्वास्थ्य केन्द्र की इमारत एक ओर रंगी पुती अलग ही नजर आती है। प्रभारी चिकित्सक अनिश्चित काल से अस्पताल में नहीं देखा गया। मौके पर मौजूद फार्मेसिस्ट विकास शर्मा का कहना था कि वे छुट्टी पर हैं। इक्का-दुक्का मरीज ही ऐसे में आता है तथा उसे फार्मेसिस्ट ही दवाई देकर औपचारिकता पूरी कर रहा है। फार्मेसिस्ट ने बताया कि उनके साथ यहां एक वार्डब्वाय, एक एलटी तथा एक एन.एम. है। एन.एम. नदारद थीं, बताया कि वे क्षेत्र में हैं।

village-hospital-in-salempur-gajraula

गांव के लोगों ने बताया कि अस्पताल नाम मात्र का ही है। यहां न चिकित्सक है और न ही जरुरी दवाईयां अथवा दूसरी कोई सुविधा। ऐसे में एक-दो मरीज ही फार्मेसिस्ट के पास छोटी-मोटी दवा लेने आता है। अस्पताल में चिकित्सक न होने का लाभ यहां पनप रहे झोलाछाप उठा रहे हैं। मरहम पट्टी और फर्स्ट एड की मामूली जानकारी वाले ये अधकचरे डॉक्टर गंभीर तथा खतरनाक रोगों का इलाज भी करने लगते हैं जिससे कई बार मरीज पहले से भी खतरनाक स्थिति में पहुंच जाते हैं।

दलित और पिछड़ी आबादी के इस विशाल गांव में लगभग 8 वर्ष पूर्व प्रथमा बैंक की शाखा खोली गयी। चंद व्यापारियों को छोड़कर यह बैंक गरीबों और दलितों के जीवन में अपेक्षित बदलाव लाने में सफल नहीं हुआ।

village-hospital-in-gajraula-damaged

पेयजल जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था में कोई मूलभूत परिवर्तन नहीं हुआ। हैंडपंप ही यहां जल प्राप्ति का एकमात्र साधन है। उधर गांव की नालियों का गंदा पानी बहकर कथित आदर्श तालाब में एकत्र होकर सड़ रहा है। गांव से सटे इस तालाब में संक्रामक रोगों के जनक मच्छर और मक्खियों की भरमार है। देखकर किसी भी तरह इस तालाब को आदर्श तालाब नहीं कहा जा सकता। हालांकि प्रधान ममता देवी और उनके पति हरिओम सिंह का कहना है कि उन्होंने एक वर्ष पूर्व जब तालाब की सफाई करायी तो उसे बिल्कुल साफ कराया गया था।

hospital-pictures-in-gajraula

गांव में बहुत पुराना डाकघर है जिसकी व्यवस्था गांव की स्थिति के मुकाबले सामान्य ही कही जा सकती है। पूर्व प्रधान जगत सिंह के बेटे वहां लंबे समय से पोस्टमास्टर हैं।

गांव में इस बार सरकारी योजना के अनुसार प्राथमिक स्कूल में अंग्रेजी पाठ्यक्रम शुरु किया गया है। यहां एक ही परिसर में जू.हा. स्कूल और प्राथमिक स्कूल चल रहे हैं। प्रधान के मुताबिक तीन सौ बच्चे पढ़ने आते हैं। पर्याप्त शिक्षक स्टाफ रहता है।

mamta-devi-gram-pradhan-salempur

ढाई वर्ष पूर्व ममता देवी पहली बार ग्राम प्रधान बनी हैं। उनका कहना है कि अपने आधे कार्यकाल में उन्होंने गांव का सर्वांगीण विकास किया है। अधिकांश मोहल्लों में सड़कें तथा खड़ंजों का निर्माण और इंटरलॉकिंग रोड बनवायी है। पंचायत घर की मरम्मत और सौन्दर्यीयकरण कराया गया है। नया बजट आते ही गांव के गरीबों तथा छोटे किसानों को मनरेगा के तहत अधिक से अधिक रोजगार मुहैया करायेंगे।

गांव से गजरौला को जोड़ने वाली डेढ़ किलोमीटर सड़क की बेहद खस्ताहालत पर वे हंस पड़े। यह गांव के लोगों की मुसीबत का बड़ा कारण है। उन्होंने विधायक राजीव तरारा तथा बीडीसी सदस्य वीरेन्द्र सिंह की प्रशंसा की तथा बताया कि दोनों नेताओं से उन्हें बराबर सहयोग मिल रहा है। गजरौला को जोड़ने वाली सड़क की मरम्मत के लिए प्रधानपति हरिओम सिंह ने विधायक से वार्ता की मंशा जतायी।

government-swasthya-kendra-salempur

चार बार प्रधान रहे वयोवृद्ध जगत सिंह ने बताया कि वे स्वयं गांव में घूमकर देख लें, विकास की हकीकत का पता चल जायेगा। बनियों वाली गली तथा रेलवे फाटक की ओर जाने वाली सड़क पर बह रहा कीचड़ और गंदा पानी विकास की पोल खोलने को काफी है।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

जरुर पढ़ें : आज़ादी के सात दशक बाद भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित सदुल्लापुर


No comments