बिजलीघरों के चक्कर काट रहे किसानों की सुनवाई नहीं

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कई माह पूर्व एस्टीमेट जमा करने के बावजूद बहुत से किसानों को विद्युत कनैक्शन तक जारी नहीं किए जा रहे.
सूखे से परेशान किसान तमाम संगठनों के सहयोग से बिजली व्यवस्था में सुधार के लिए आएदिन बिजलीघरों पर धरने और पंचायतों के आयोजन कर रहे हैं। उनकी पहली मांग सूख रही फसलों के बचाव के लिए कम सकम 20 घंटे निर्बाध विद्युत आपूर्ति है। समय पर लाइनों की मरम्मत तथा फुंके ट्रांसफार्मर अविलम्ब बदलने की भी किसान लगातार मांग कर रहे हैं। कई माह पूर्व एस्टीमेट जमा करने के बावजूद बहुत से किसानों को विद्युत कनैक्शन तक जारी नहीं किए जा रहे। यह शिकायत भाकियू नेता आयेदिन कर रहे हैं लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हो रही।

भाकियू जिलाध्यक्ष डूंगर सिंह का कहना है कि किसानों को 24 घंटे बिजली आपूर्ति का वायदा कर बिजली बिल बढ़ा दिए गये लेकिन 10-12 घंटे भी नियमित आपूर्ति नहीं हो रही। एक-एक कर बिजली से आधा पानी कच्ची नालियां ही पी जाती हैं। यदि 15-20 घंटे लगातार बिजली आए तो सूखे में सिंचाई हो सकती है। अन्यथा नहीं। 

गजरौला, हसनपुर, जोया तथा अमरोहा के किसान आएदिन भाकियू के झंडों के नीचे विद्युत समस्याओं के लिए तपती दोपहरी में भूखे-प्यासे धरने हो रहे हैं। विद्युत अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी उन्हें कोरे आश्वासन देकर टरका देते हैं। यही वजह है कि किसान सूखे से मुकाबला करने में पूरी तरह सफल नहीं हो रहे। फसलों में मौसमी मार से भारी नुक्सान हो चुका और अभी भी किसी राहत की शीघ्र उम्मीद नहीं।

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.

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