तपते मौसम और सूखे से निजात को आकाश की ओर ताक रहे लोग

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पोखर-तालाब सूखे, नीचे खिसक रहा भूजल स्तर, बोरिंग भी बोल गए..
इस बार मानसून कुछ ज्यादा ही सुस्त है। आसाढ़ खत्म होने को है और अभी तक बरसात का कहीं अता-पता नहीं। खेतों से शहरों तक लोग भीषण गर्मी में आसमान की ओर निहारते-निहारते थक गए लेकिन दो बूंद भी बरसना नहीं चाहतीं। ताल-तलैया तक प्यासे हैं और नलकूप रात-दिन चलने के बावजूद प्यासी फसलों की प्यास बुझाने में सफल नहीं हो पा रहे। ऐसे में भूगर्भीय जलस्तर तेजी से नीचे खिसक रहा है। कई बोरिंग कम पानी दे रहे हैं जबकि अनेक ने पानी देना ही बंद कर दिया है। ऐसे में रिबोर का खर्च किसानों पर अचानक आने से उनका बजट बिगड़ गया है। बढ़ते बिजली बिलों से वह पहले ही परेशान हैं।

वैसे तो गन्ना, चारे, दलहन तथा धान में पानी की बहुत जरुरत है। किसान जैसे-तैसे वर्षा के इंतज़ार में इन्हें बचाए हुए हैं लेकिन लौकी, तोरी, टमाटर, अरबी, भिंडी, करेला आदि सब्जियों की फसलों में सिंचाई की लगातार जरुरत है। इन फसलों की लागत ऐसे में बेतहाशा बढ़ गयी है साथ ही कई खेतों में पर्याप्त सिंचाई न होने से ऐसी फसलें दम तोड़ने लगी हैं। फलों से लदी बेलें तथा पौधों को सूखता देखकर सब्जी उत्पादक परेशान हैं। उनका चैन और नींद गायब है। तरबूज-खरबूजों की फसलें भी सूखे के कारण किसानों ने समय पूर्व ही उजाड़ दीं। 

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सूखा लंबा खिंचने से किसानों का संकट बढ़ता जा रहा है। यदि बरसात और टल गयी अथवा पानी कम बरसा तो कृषि संकट बढ़ जायेगा। इससे धान, गन्ने तथा सब्जियों के उत्पादन पर बहुत बुरा असर पड़ेगा। यह देश की अर्थव्यवस्था की रफ्तार को जो पहले ही सुस्त है और कमजोर करेगा। सूखे की पड़ रही मार से हमारी सरकारें और प्रशासनिक अमला लगता है बेखबर है। तभी तो गांवों में पर्याप्त बिजली भी नहीं भेजी जा रही है। ऐसे में 24 घंटे वहां बिजली भेजी जाए तो इस संकट से काफी बचाव हो सकता है।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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