सावन : एक सांस्कृतिक महापर्व

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इस माह में हिन्दू धर्म के सबसे बड़े देवता 'महादेव’ की पूजा अर्चना की जाती है.
उत्तर भारत की लोक संस्कृति में एक बेहद लोकप्रिय गीत 'कच्ची नीम की निबौली, सावन जल्दी अइयो रे’ रिमझिम बरसात में हिन्दी भाषी क्षेत्रों में गाया जाता रहा है। सावन भारतीय संस्कृति के हर क्षेत्र में बराबर चर्चित और लोकगायन का महीना रहा है। हमारे पुरातन ग्रंथ सावन की महिमा से भरे पड़े हैं। संस्कृत साहित्य के 'षडत्रनृतु दर्शन’ में सावन प्रकृति को सजीव बनाये रखने का महीना है। बॉलीवुड फिल्मों के अनेक गीतों में इस माह का विभिन्न प्रकार से वर्णन किया गया है। 'सावन का महीना पवन करे शोर, मन मेरा झूमे जैसे बन में नाचे मोर’ फिल्मी गाने की पंक्तियां बार-बार सुनने को किसका मन नहीं करता। 'सावन के झूले पड़े’ जैसे अनेक सदाबहार गीत भारतीय फिल्मों में कई स्थानों पर रचे गये हैं।

वास्तव में सावन माह विभिन्न धार्मिक मान्यताओं का महीना भी है। इस माह में हिन्दू धर्म के सबसे बड़े देवता 'महादेव’ की पूजा अर्चना और उनका जलाभिषेक करना महापुण्यकारक तथा मनोकामना पूरी करने वाला बताया गया है। मान्यता है कि प्रत्येक सोमवार को सावन माह में भगवान आशुतोष का जलाभिषेक करने से तमाम पुण्यों का फल प्राप्त होता है। भगवान शिव के जलाभिषेक के लिए इसी कारण प्रतिवर्ष सावन माह में हरिद्वार गंगाजल लेने लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

सावन माह में चार-पांच दशक पूर्व तक गांव-गांव पेड़ों पर झूलों की बहार रहती थी। नव युवतियों से लेकर वृद्ध महिलायें तक इन झूलों पर सावन के गीतों की स्वर लहरियों के साथ झूलने का आनन्द उठाती थीं। दिन ढलने से हल्की फुहारों के बीच देर रात तक गीत मौसम में रस घोलते रहते थे। एक नव स्फूर्ति और उमंग का माहौल उत्पन्न हो उठता था। चारों ओर फैली हरियाली और नाचते मोर स्वर्गिक आनन्द में सराबोर कर देते थे।
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मध्यकालीन भक्त कवियों की पीड़ा अपने परम प्रिय परमात्मा से मिलने की जो तड़प सावन में उठती थी वह किसी दूसरे माह में नहीं।

एकेश्वरवादी महान सन्त कबीरदास जी बरसते बादलों में पुकार उठे थे -
अम्बर कुंजा कुरलियां, गरज भरे सभ ताल।
जो साहिब सों बिछुड़े तिनके कवन हवाल।।

सद्गुरु नानक देव तथा गुरु अर्जुनदेव ने सावन माह में भगवान और भक्त के भक्तिभाव पर विस्तार से आदि गुरुग्रंथ साहिब में बहुत ही साधना पूर्ण विचार व्यक्त किए हैं।

रीतिकालीन, सौन्दर्य उपासक कवियों की रचनाओं में सावन माह पर प्रेमी-प्रेमिका और उनके विरह-वियोग पर विस्तृत वर्णन मिलता है। कई जगह सूफी संतों ने इसे आत्मा और परमात्मा के मिलन का पवित्र अवसर करार दिया है।

वास्तव में सावन बहुत महत्वपूर्ण है। अच्छा सावन बरसता है तो पशु-पक्षी, कृषि और वन सम्पदा में नवजीवन का संचार होता है। मानव जीवन बिना जल के अस्तित्वहीन है। अपने अस्तित्व और सुख समृद्धि के लिए मानव हमेशा अच्छी बरसात की कामना करता है, यह सभी जानते हैं कि अकेला सावन हमें इतना जल प्रदान करता है जितना दूसरे सभी महीनों में बरसता है। तभी तो हमारे लोकगीतों में हम 'सावन जल्दी अइयो रे’ की टेर लगाते हैं। हम सभी को सावन की रिमझिम बरसात की मंगल कामना करनी चाहिए ताकि 'शस्य श्यामला भारत भूमि’ अपने सनातन अस्तित्व को बनाए रखे।

-जी.एस. चाहल.

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