बुनियादी शिक्षा में गुणात्मक बदलाव के अग्रदूत जोगिन्दर सिंह

प्रधानाचार्य जोगिन्दर सिंह ने कैसे बदली एक जर्जर प्राथमिक स्कूल की सूरत?
प्राथमिक विद्यालय तिगरी को प्रधानाचार्य जोगिन्दर सिंह ने अपनी लग्न, परिश्रम तथा शिक्षा के प्रति लगाव के बल पर दो वर्षों में सूबे के श्रेष्ठ स्कूल में तब्दील कर दिया। तीन वर्ष पूर्व वे जब स्कूल में भेजे गए थे तो इस स्कूल के तमाम कमरे किसी घुड़साल से भी बदतर थे। खिड़कियां टूट कर जर्जर हो चुकी थीं। गंदगी और टूटे-फूटे फर्श की हालत में बच्चों को बैठने का भी उचित स्थान नहीं था। पीने के पानी और शौचालयों तक का उचित स्थान नहीं था। पूरा स्कूल अस्त-व्यस्त था जहां मुश्किल से दो सौ बच्चे पढ़ने आते थे हालांकि यह गांव विकास खण्ड गजरौला का सबसे बड़ी आबादी वाला है। यह एक पवित्र तीर्थ स्थल है जो पवित्र गंगा नदी के तट पर बसा है।

इस स्कूल की दुर्दशा की ओर ग्राम सभा से लेकर ब्लॉक स्तर अथवा जिला पंचायत स्तर तक किसी ने ध्यान नहीं दिया। स्कूल में दलित, पिछड़े तथा अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे पढ़ते हैं।

तीन वर्ष पूर्व यहां युवा शिक्षक जोगिन्दर सिंह की नियुक्ति हुई तो वे स्कूल की इमारत से लेकर बच्चों की शिक्षा तक की स्थिति देखकर चकित रह गए। उन्होंने कार्यभार ग्रहण करते ही यहां बदलाव की बयार के लिए सुनियोजित प्रक्रिया के तहत काम करना शुरु किया।
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सबसे पहला काम स्कूल की बदरंग इमारत और उसमें व्याप्त गंदगी पर उन्होंने फोकस कर सफाई करायी। टूटी तथा जर्जर खिड़कियों की जगह नयी खिड़कियां लगवायीं। इमारत के प्लास्टर की मरम्मत के बाद उसपर रंग और पुट्टी करायी। इसमें उन्होंने अपनी जेब से काफी पैसा लगाया। जो विभागीय सहयोग मिला वह अपर्याप्त था।

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फर्श का नवीनीकरण, रसोई में सुन्दर टाइल्स, शौचालय तथा बच्चों के हाथ आदि धोने को टाइल्स के फर्श और दीवारों वाले एक सुन्दर कक्ष का निर्माण बेहद प्रशंसनीय है। वहां स्टील की शानदार टोटियां तथा साबुन का प्रबंध हर समय रहता है।

पीने तथा बर्तन आदि धोने को यहां इंडिया मार्का पम्प है लेकिन इसे अपर्याप्त मानकर जोगिन्दर सिंह ने सबमर्सिबल पम्प लगाया जिसके लिए छत पर दो टैंक लगाए। इसमें होने वाला तमाम खर्च उन्होंने अपने वेतन से किया। शौचालय, रसोई, पीने तथा अन्य जरुरतों के लिए पर्याप्त जल के लिए ऐसा किया गया।

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सुबह की प्रार्थना के लिए पक्का मंच उसके सामने इंटरलॉकिंग का स्थान है जहां सभी बच्चे आसानी से स्थान प्राप्त कर सकते हैं। इसमें ग्राम सभा के फण्ड से काम कराया गया है। गजरौला की जुबिलेंट लाइफ साइंसेज की भरतिया फाउंडेशन ने भी अच्छा काम होता देख कुछ सहयोग किया।

कक्षों के बाहर दीवारों पर शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वच्छता आदि से संबंधित नारे तथा विचार सुन्दर तथा स्पष्ट अक्षरों में लिखे गये हैं। गंगा तट पर स्थित इस स्कूल में जहां बहुत ही स्वच्छ वातावरण है वहीं उसके चारों ओर गंदगी का साम्राज्य है। यह काम ग्राम समाज तथा गांव के लोगों का है जिसकी ओर से वे बेहद लापरवाह हैं।

स्कूल की पांच कक्षाओं के लगभग चार सौ बच्चों को शिक्षित करने के लिए छह अध्यापक तथा शिक्षामित्र हैं। स्कूल में प्रवेश करते ही शांति और स्वच्छता का वातावरण मिलता है। कक्षाओं में बच्चे मुलायम कालीन पर शांतिपूर्वक बैठे शिक्षकों की बातों को गंभीरता से सुनते देखे जाते हैं। ठेठ ग्रामीण परिवेश के बच्चे इतने स्वच्छ तथा आकर्षक हो गये हैं जैसे शहरी परिवेश के महंगी फीस वाले स्कूलों में पढ़ने वाले। श्यामपट पर लिखी सुन्दर लिखाई से पता चलता है कि प्रधानाचार्य जोगिन्दर सिंह ने अध्यापकों को अपने सांचे में ढालने में भी सफलता हासिल कर ली है।

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सभी बच्चे पूरी तरह बेहद अनुशासित दिखाई देते हैं। कक्षों के बाहर जूते, चप्पल उतारकर कालीन पर बैठकर पढ़ते देखे जा सकते हैं।

छुट्टियों में भी समय निकालकर बच्चों को पढ़ाते हैं जोगिन्दर सिंह

जोगिन्दर सिंह छुट्टियों में भी समय निकालर बच्चों को शिक्षित करते हैं। वे जून महीने में भी शिक्षा के लिए अपनी सेवायें देते हैं तथा रविवार को अवकाश के समय पर उपलब्ध रहते हैं।

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केवल शिक्षा के क्षेत्र में नहीं बल्कि बच्चों को खेल, विज्ञान और स्वास्थ्य के बारे में दो घंटे की स्मार्ट क्लास लगाने का काम भी यहां हो रहा है। स्मार्ट कक्ष में उन्होंने अपने पैसे खर्च कर एक प्रोजेक्टर लगाया है। जिसके द्वारा वे छात्रों को क्रमशः विज्ञान तथा सामान्य ज्ञान और कई महत्वपूर्ण विषयों का अध्ययन कराते हैं जिससे छात्र-छात्रायें बहुमुखी ज्ञान अर्जित कर सकें।

'केवल किताबी ज्ञान इसके लिए पर्याप्त नहीं' -यह मानना है प्रधानाचार्य जोगिन्दर सिंह का। खेल प्रतियोगिता तथा योग में स्कूल के कई बच्चे मंडल और प्रदेश स्तर तक स्कूल का नाम रोशन कर चुके।

मध्यान्ह भोजन की सबसे बेहतर व्यवस्था

रसोई, बर्तन तथा सभी व्यवस्था बहुत ही स्वच्छ और व्यवस्थित है। जिन महिलाओं को भोजन तैयार करते पाया वे स्वच्छ कपड़े तथा पूरी तरह स्वच्छता का पालन करती पायी गयी हैं। खाना मैन्यू के मुताबिक तैयार कराया जाता है।

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स्कूल की शिक्षा, अनुशासन, स्वच्छता आदि के कारण स्कूल में चार सौ के करीब बच्चे हैं और प्रवेश के लिए बच्चों का आना जारी है। अधिकारियों को इस स्कूल से प्रेरणा लेकर दूसरे भी अध्यापकों को जोगिन्दर सिंह का अनुसरण करने को कहा जाए तो परिषदीय स्कूलों की शिक्षा में सुधार हो सकता है।

विधायक राजीव तरारा ने जोगिन्दर सिंह को सम्मानित किया

प्राथमिक विद्यालय तिगरी के प्रधानाचार्य जोगिन्दर सिंह ने मात्र तीन वर्ष में शिक्षा क्षेत्र में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। इसके लिए उन्हें बार-बार जिम्मेदारों ने सम्मानित भी किया है।

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इसी माह धनौरा विधायक राजीव तरारा और जिलाधिकारी ने उनके विद्यालय को प्रदेश के श्रेष्ठ विद्यालयों की टॉप सूची में स्थान मिलने पर सार्वजनिक रुप से सम्मानित किया तथा कहा कि दूसरे शिक्षक भी उनका अनुसरण करें तो देश की भावी पीढ़ियां नए भारत के निर्माण का सपना साकार करने में निश्चित सफल होंगी।

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-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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