बाढ़ से हज़ारों हैक्टेअर फसल बर्बाद, सरकारी मदद नदारद

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चिकित्साधिकारी भयंकर बीमारियों और कुछ मौतों के शोर के बाद जागते हैं.
तहसील के खादर क्षेत्र के डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों में आयी बाढ़ के कारण लोगों की फसलों में भारी तबाही हुई है जिसका ठोस अनुमान अभी नहीं लगाया जा सकता।  समाचार लिखे जाने तक इन गांवों की हजारों एकड़ फसलें जलमग्न हैं जिनमें गन्ना, धान, पीपरमेंट, सब्जियां तथा हरा-चारा शामिल हैं। कई दलहनी फसलें तो बिल्कुल बरबाद हो गयीं। कई घरों में पानी भरने तथा भूसा आदि गलने से भी बहुत नुक्सान हुआ है। अधिक खतरनाक इलाके से बहुत से लोगों को चकनवाला के एक इंटर कालेज तथा पथवारी गांव में ठहराया गया था। जिनके लिए गजरौला की जुबिलेंट लाइफ साइंसेज लि. कंपनी की ओर से कुछ खाद्य सामग्री तथा दवायें भी भेजी गयीं। उधर डीएम तथा धनौरा के एसडीएम ने भी लोगों से बात की थी तथा उनका हालचाल जाना। शासन और प्रशासन की ओर से एक माह से बाढ़ का सामना कर रहे लोगों के हुए नुक्सान की भरपायी तो क्या क्षति का आकलन तक नहीं किया।

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विधायक राजीव तरारा कई बार बाढ़ पीड़ितों के पास पहुंचे और नाव तथा ट्रैक्टर के सहारे बाढ़ग्रस्त इलाके में जाकर बाढ़ से घिरे लोगों की समस्यायें जानीं तथा प्रशासन को सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। वे लखनऊ जाकर बाढ़ पीड़ितों के हुए नुक्सान की भरपायी के लिए शासन से मांग भी कर रहे हैं। विधायक ने डीएम तथा धनौरा के एसडीएम से बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में दवाईयां, मिट्टी का तेल, गैस तथा चीनी और गल्ला जैसे जरुरी चीज़ें शीघ्र उपलब्ध कराने को कहा है। इलाके में संक्रामक रोग फैलने शुरु हो गये हैं तथा पशुओं में खुरपका और गलघोंटू रोग फैलने की आशंका है। पूरे क्षेत्र में शुद्ध पेयजल का अभाव है। बाढ़ के पानी ने हैंड पंपों का जल दूषित कर दिया है। लोग मजबूरी में यही जल पी रहे हैं। डायरिया जैसी बीमारियों का खतरा उपत्पन्न हो गया है। पेचिस और हैजे जैसी बीमारियों का प्रकोप शुरु हो गया है। वायरल फीवर की चपेट में भी कई लोग आए हैं। कई गांवों में चिकित्सक नहीं पहुंचे। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी बाढ़ ग्रस्त क्षेत्र में नहीं जाना चाहते। चिकित्साधिकारी भयंकर बीमारियों और कुछ मौतों के शोर के बाद जागते हैं। यदि वे संवेदनशील होते तो बरसात शुरु होते ही संभावित बाढ़ ग्रस्त गांवों में दवाओं और चिकित्सकों का प्रबंध करते।

-टाइम्स न्यूज़ मंडी धनौरा.

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