गंगा के खादर में बाढ़ से धान, गन्ना, दलहन तथा चारे की फसलों में भारी तबाही

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जिन खेतों से बरसात से पूर्व उसे काट लिया गया वह बच गया. हरे चारे में से 80 फीसदी बह गया या गल गया.
गंगा के खादर में स्थित डेढ़ दर्जन से अधिक गांवों की हज़ारों एकड़ फसल में पानी से भारी क्षति हुई है। जिसका अनुमान करोड़ों के करीब है। सबसे बड़ा नुक्सान चारे, दलहन तथा मैंथा की फसलों में हुआ है। धान और गन्ने में भी नुक्सान दिखाई पड़ रहा है।

हरे चारे में से अस्सी फीसदी बह गया अथवा गल गया। भूसे के बोंगे पूरी तरह सड़ गये। कृषि के साथ पशुपालन खादर के लोगों का खास व्यवसाय है। भूखे पशु पानी में खड़े-खड़े बीमार पड़ गये हैं। कुछ लोगों ने ऊंचे स्थानों पर उन्हें शरण दी है लेकिन चारे का उचित प्रबंध न होने से उनके सामने संकट है। कई पशु पानी में बह गये।

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हरे चारे के लिए यहां ज्वार और बाजरा उगाया जाता है जिसमें से अधिकांश पानी में डूबने से बरबाद हो गया। जो थोड़ा बहुत बचा है उसे लाने को गहरे पानी से होकर गुजरना कठिन है।

उड़द और मूंग जैसी दलहनी फसलें शत-प्रतिशत नष्ट हो चुकीं। ये थोड़े पानी में ही डूब गयीं और अभी तक पानी में ही सड़ रही हैं। मैंथा भी पूरी तरह खत्म हो चुका। जिन खेतों से बरसात से पूर्व उसे काट लिया गया वह बच गया।

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धान और गन्ने की फसलों में भी बाढ़ के पानी से भारी क्षति हुई है। गन्ना काला पड़ जायेगा जिसकी बढ़वार रुकेगी और भाड़े के भाव कोल्हू या क्रेशरों पर बेचने को मजबूर होना होगा। धान भी पानी में हफ्तों तक डूबने से गलने लगा है। यदि मौसम साफ नहीं हुआ और बरसात जारी रही तो धान की फसल में भारी तबाही से इंकार नहीं किया जा सकता।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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