गंगा के खादर के डेढ़ दर्जन गांव बाढ़ में घिरे

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पशुओं के चारे के चारे तक का अभाव है और लोग जागकर रातें काट रहे हैं.
चकनवाला और सीसोंवाली के बीच बहने वाले बाहे पर इस बार भी पुल न बनने से गंगा के खादर के डेढ़ दर्जन गांव एक बार फिर बाढ़ से घिर गए हैं। इन गांवों का तमाम कृषि क्षेत्र जलमग्न है और गांवों में भी कई जगह गंगा में आए उफान से पानी भर गया है। ऐसे गांवों का संपर्क शेष इलाके से कट गया है। अभी बरसात की पूरी संभावना है जिससे गांवों के लोगों में भय व्याप्त है। कोई भी प्रशासनिक अधिकारी या कर्मचारी इन गांवों के लोगों की सुध लेने तक को नहीं पहुंच रहा, हालांकि यहां की स्थिति के बारे में तमाम अखबार लगातार खबरें छाप रहे हैं। उधर गांव वालों की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं। सबसे बदतर हालत पशुओं की है। पशुपालन यहां मुख्य व्यवसाय होने के कारण लोगों के पास भारी संख्या में पशु हैं। उन्हें जल रहित स्थान सुलभ कराना नामुमकिन हो गया है। कुछ लोगों ने ऊंचे चबूतरों पर रखा हुआ है। हरा-चारा पानी में डूब गया है जिसे गहरे पानी से होकर लाना भी नामुमकिन है। ऐसे में सूखे भूसे के सहारे लोग काम चला रहे हैं। कई जगह भूसे के बोगों में भी पानी भर गया जिससे वह गलने लगा है। ऐसे में कोई सहायता नहीं मिली तो पशु भूखों मरने लगेंगे।

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इन गांवों के लोग रात जागकर गुज़ार रहे हैं। उधर हरिद्वार और बिजनौर बैराज से पानी छोड़ने से भी स्थिति और भयावह हो जाती है। पहाड़ी क्षेत्रों में बरसात के कारण दोनों जगह पानी बढ़ने से पानी छोड़ना मजबूरी है।

सीसोवाली, जोटोवाली, मीरावाली, दियावली, मंदिरोंवाली तथा ढाकोवाली समेत डेढ़ दर्जन गांव बाढ़ में घिरने से वहां का सामान्य जन-जीवन बुरी तरह अस्त-व्यस्त हो चुका है।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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