बिजली दरें घटाने और गन्ना मूल्य बढ़ाने की मांग

village-tube-well-pics
सरकार चुनावों के मौके पर किसानों की तरफदारी करती नहीं थकती लेकिन उसके बाद शिकंजा कसना शुरु कर देती है.
बढ़ती बिजली दरें, लटका गन्ना भुगतान जैसी समस्याओं से जूझते उत्तर प्रदेश के किसान लगातार धरने, प्रदर्शन और आंदोलन कर रहे हैं। उनकी सुनवाई नहीं हो रही। गन्ना मूल्य को लेकर प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्य के किसान इस समय भारी उलझन में हैं। सरकार ने गन्ना मूल्य की अभी तक घोषणा नहीं की जबकि अगले माह क्रेशर और कोल्हू चालू हो जायेंगे और चीनी मिल भी तैयारी में जुट जायेंगे। मिलों को पहले तैयार हो जाना चाहिए क्योंकि मिलों की सिफारिश पर किसानों ने गन्ने की अगेती किस्मों को बोया है जो अक्टूबर में तैयार हो रही हैं।

सरकार चुनावों के मौके पर किसानों की बार-बार तरफदारी करती नहीं थकती लेकिन उसके बाद उनपर शिकंजा कसना शुरु कर देती है। बिजली बिल बढ़ाना और गन्ना मूल्य घोषित न करना इसी की बानगी है। किसानों की मांग है कि बिजली बिल, डीजल और बीजों के दाम बढ़ाये गये हैं तो गन्ने के भाव भी बढ़ने चाहिए। भाकियू सहित तमाम किसान संगठन गन्ना मूल्य 450 रुपये करने की मांग कर रहे हैं, तो बढ़ती कृषि लागत के हिसाब से गलत नहीं हैं लेकिन सरकार की खामोशी से लगता है कि वह गन्ना मूल्य बढ़ाना नहीं चाहती। 
sugarcane-in-the-field

वैसे भी सूबे की भाजपा सरकार के पिछले दो वर्षों से गन्ना मूल्य लगभग स्थिर है। उसे केन्द्र और राज्य चुनावों में किसानों का बिना मूल्य बढ़ाए ही समर्थन मिल गया, तो उसे बढ़ाने की जरुरत भी नहीं। किसान संगठन वैसे ही आपस में विभाजित हैं। ऐसे में वे सरकार पर दवाब बनाने में सफल नहीं हैं। गन्ना मूल्य बढ़ने की उम्मीद नहीं बल्कि उसे कम किए जाने की संभावना है। क्योंकि सरकार किसानों के बजाय मिलों को पैकेज दे रही है।

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.

No comments