प्रदूषण की मार झेल रहे क्षेत्रवासियों को दीपावली की आतिशबाजी से चिन्ता

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दीपावली हमारे त्योहारों में बहुत ही पवित्र और पसंदीदा त्योहार है...
पहले ही प्रदूषण की मार झेल रहे गजरौला तथा आसपास के क्षेत्र के लोग दीपावली जैसे महापर्व पर आतिशी प्रदूषण के प्रति सचेत हो गए हैं। इनमें गजरौला, धनौरा तथा हसनपुर के कई प्रतिष्ठित तथा जागरुक लोगों ने दीपावली को प्रदूषण मुक्त और शांतिपूर्ण प्रकाश पर्व की तरह मनाने के लिए जो विचार व्यक्त किए हैं, उन्हें यहां प्रस्तुत किया जा रहा है।

गजरौला के सबसे पुराने चिकित्सक डॉ. श्याम सिंह ने बताया कि दीपावली हर्षोल्लास तथा प्रकाश का त्योहार है। जिसपर स्वच्छता का विशेष ध्यान रखा जाता है। आजकल वातावरण मानवीय त्रुटियों से बुरी तरह प्रदूषित होता जा रहा है। जिससे भयंकर बीमारियां फैल रही हैं। हमें वैसे तो हमेशा ही स्वच्छता बनाए रखना चाहिए लेकिन त्योहारों पर विशेष ध्यान देने की जरुरत है। पटाखे और आतिशबाजी पर हम सभी को संयम की जरुरत है। त्योहार और विशेष मौकों पर इसके अलावा मनोरंजन के दूसरे भी साधन हैं। ऐसे में बारुदी जश्न से बचना होगा।

मंडी धनौरा के चिकित्सक डॉ. बीएस जिंदल ने भी इसी तरह के विचार रखे तथा कहा कि बारुदी जहर पर रोक लगनी चाहिए। इससे वातावरण को भारी क्षति पहुंचती है। हमारे लिए यह घातक है।

मिष्ठान विक्रेता अरविन्द अग्रवाल का कहना है कि प्रतीक स्वरुप फुलझड़ी आदि पटाखे सीमित मात्रा में इस्तेमाल किए जाने चाहिए जो प्रदूषण न बढ़ायें बल्कि इनसे भी परहेज किया जाये तो बहुत बेहतर होगा। उन्होंने कहा कि दीपावली दीपों का त्योहार है। अमावस्या की रात में जगमग जलती दीपकों की पंक्तियां स्वर्गिक आनन्द का आभास कराती हैं। कानफोड़ू और जहरीले धुंए तथा दुर्गन्ध से तो पूरा वातावरण ही खराब होता है। उन्होंने मिष्टान का भरपूर आनन्द उठाने की राय भी दी। यह प्रदूषण रहित भारतीय परंपरा है।

हसनपुर निवासी वरिष्ठ बसपा नेता हेम सिंह आर्य का कहना है कि दीपावली दीपों का महापर्व है जो शरद ऋतु के आगमन पर मनाया जाता है। दीपोत्सव के इस त्योहार पर अपने शुभचिंतकों तथा मित्रों आदि के बीच मिष्ठान की भी परंपरा जुड़ी है। पता नहीं आतिशबाजी इतने शांत और सुखद वातावरण को प्रदूषित करने के लिए कब और क्यों किसने चालू की। इसपर या तो विराम लगना चाहिए अथवा बहुत सीमित मात्रा में पटाखों आदि का प्रयोग हो। 

जागरुक गृहणी मीनाक्षी चौधरी का कहना है कि दीपावली हमारे त्योहारों में बहुत ही पवित्र और पसंदीदा त्योहार है। इसे शांति के साथ मनाया जाना चाहिए। पकवानों और मिष्ठानों का आनंद हर घर-परिवार में लिया जाता है। अंधेरी रात में दीपों के प्रकाश में उत्साह और भी बढ़ जाता है। कई जगह असावधानी में आतिशबाजी से दुर्घटनायें हो जाती हैं जिसमें महिलायें तथा बच्चे अधिक शिकार होते हैं। बच्चों की जिद को शांत कर महिलाओं को चाहिए कि वे पटाखे कम से कम मात्रा में प्रयोग करें। हो सके तो इससे बचें। क्योंकि प्रदूषण हमसे अधिक हमारी  संतानों के लिए खतरनाक है।

भगवान सिंह काले, मो. यासीन, रामकृष्ण चौहान, डॉ. एलसी गहलौत, नवीन गर्ग, आदि ने भी शांति व सौहार्द से दीपावली मनाने की अपील की है।

~टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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