दिल्ली सरकार से सीखे यूपी सरकार

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दिल्ली में नाम मात्र का घाटा हो रहा है, जबकि उत्तर प्रदेश में बिजली मूल्य दिल्ली से लगभग दोगुना है.
उत्तर प्रदेश देश का सबसे महंगी बिजली वाला राज्य बन गया है। बिजली विभाग और सरकार जब चाहती हैं विद्युत बिल बढ़ा देते हैं। देश की राजधानी से सटे इस राज्य के लोग महंगी बिजली से परेशान हैं। हर बार बढ़ते घाटे का बहाना गढ कर मूल्य बढ़ा दिए जाते हैं। जबकि घाटा उसके बाद भी पूरा नहीं होता बल्कि पहले से अधिक बढ़ जाता है।

वास्तव में उपभोक्ताओं विशेषकर ईमानदार उपभोक्ताओं का यहां शोषण किया जाता है। विद्युत विभाग (निगम) के अधिकारी और उनके साथी यानी ठेकेदार मिलकर उपभोक्ताओं का शोषण करते आ रहे हैं। हाल ही में निजि कंपनी के कर्मचारियों ने गजरौला में नकली मीटर लगा दिए। पता चलने पर विभाग के अधिकारियों ने उपभोक्ताओं को ही दोषी ठहरा दिया।

विद्युत विभाग के अधिकारी बड़े बकायेदारों खासकर सरकारी विभागों से वसूली करने में लापरवाह हैं। बिजली की विशाल रकम इसी तरह के उपभोक्ताओं पर बकाया है। सामान खरीदने, गुणवत्ता से खिलावाड़ करने की घटनायें आम हैं जिनपर मिलजुलकर पर्दा डाला जाता है। घाटे के लिए विभागीय भ्रष्टाचार सीधा दोषी है। जिसे समाप्त करने की कोई कोशिश होती नहीं दिखती। सरकार को घाटे की भरपायी के लिए उपभोक्ता सस्ता उपाय लगता है, उसपर भार डाल दिया जाता है। 

दिल्ली में, जहां आम आदमी पार्टी की सरकार है, वहां सबसे सस्ती बिजली उपभोक्ताओं को मिल रही है। इसी के साथ 24 घंटे बिजली रहती है। मजेदार बात यह है कि वहां नाम मात्र का घाटा हो रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश में ठीक प्रकार बिजली भी नहीं मिल रही है। तथा मूल्य दिल्ली से लगभग दोगुना है। गांवों को तो आठ-दस घंटे भी इस समय बिजली नहीं दी जा रही। इस सबके बावजूद विभागीय घाटा बहुत अधिक बताया जा रहा है। बिजली कंपनियों से 2.5 रुपए यूनिट खरीदी गयी बिजली उपभोक्ताओं को पांच से 8 रुपए बेची जाने के बाद भी घाटे का रोना स्पष्ट करता है कि यहां मामला गड़बड़ है। उपभोक्ताओं पर बोझ डालने के बजाय उत्तर प्रदेश सरकार अरविन्द केजरीवाल से सीखे ताकि उपभोक्ताओं और विभाग दोनों का भला हो सके।

-जी.एस. चहल.

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