श्रद्धालुओं की जेब खाली, कैसे हो गंगा मेले की तैयारी?

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मिल चालू होने तक जरुरतमंद छोटे और सीमांत किसान अधिकांश गन्ना सस्ते में लुटा चुके होंगे.
दीपावली और गंगा स्नान की तैयारी मेला आयोजकों की ओर से शुरु हो गयी है। दशहरा और देवोत्थान इसके साथ जुड़कर त्योहारी परंपरा की एक मजबूत श्रंखला बनाते हैं। इन सभी त्योहारों के आगे-पीछे आने से परिवारों का खर्च बढ़ जाता है। एक साथ बड़ा आर्थिक बोझ पड़ता है।

गंगा स्नान से पूर्व लोगों को शरद ऋतु के लिए गर्म कपड़ों, रजाई, गद्दों आदि का भी प्रबंध करना होता है। गंगा स्नान में सबसे अधिक लोग ग्रामीण और कृषक होते हैं। यह मेला ग्रामीण भारत का मेला माना जाता है। जहां कृषि और पशुपालन लोगों का मुख्य व्यवसाय है। इसमें भूस्वामी और भूमिहीन दोनों ही वर्ग शामिल हैं।

इन लोगों की एक बड़ी आय गन्ने और धान के सहारे है। इसी के साथ गेहूं, लाही, सरसों, बरसीम आदि रबी की फसलों की बुवाई की तैयारी के लिए खाद, बीज और जुताई का खर्च भी चाहिए। लोग धान और गन्ना बेचकर त्योहारों के साथ रबी की फसल के लिए धन का प्रबंध करते हैं। अभी इक्का-दुक्का क्रेशर और कोल्हू ही चले हैं जहां गन्ना डेढ़ सौ रुपयों से अधिक नहीं है। जबकि किसान संगठन 450 की मांग कर रहे हैं। भारतीय किसान मजदूर संगठन तो 465 रुपये की मांग कर रहा है। इसी ऊहापोह में हो सकता है चीनी मिल समय से न चलें। वैसे भी चीनी मिल नवम्बर-दिसम्बर से पहले चालू भी नहीं होते। मिलों के चालू होने तक जरुरतमंद छोटे और सीमांत किसान अपना अधिकांश गन्ना सस्ते में लुटा चुकेंगे। यह आज की बात नहीं दशकों से ऐसा ही होता आ रहा है। मिल चलेंगे भी तो भुगतान दबाये बैठे रहेंगे। अभी कई मिलों पर पिछले सीजन का बकाया पड़ा है।

गंगा मेले में पूरा बाजार लगता है। खेल तमाशों यानी मनोरंजन के साधनों के साथ ही यहां सभी उपभोक्ता सामान और खान-पान की चीजों का व्यवसाय होता है। इस बार मंदी का प्रभाव मेले में भी पड़ने से इंकार नहीं किया जा सकता। दुकानदार मंदी की मार से सशंकित हैं। वे बहुत सोच समझकर इस बार यहां आने की तैयारी करेंगे। स्नानार्थी बहुत सोच समझकर खर्च करेंगे साथ ही कम से कम समय यहां लगायेंगे। एक दो दिन से अधिक रुकने वाले वे ही लोग होंगे जो स्थायी वेतनभोगी हैं। उनपर मंदी-तेजी का कोई फर्क नहीं पड़ता। ऐसे लोग कम ही हैं।

भाजपा नेता और जिला पंचायत अध्यक्ष सरिता चौधरी के पति चौ. भूपेन्द्र सिंह का कहना है कि इस बार मेला पिछली बार के सभी मेलों से बेहतर व्यवस्था के साथ संपन्न होगा। इसके लिए तैयारियां भी जल्दी शुरु करा दी गयी हैं। वे स्वयं तैयारियों में जुटे हैं। गंगा पूजन और दुग्धाभिषेक भी पिछली बार से जल्दी कराया जाना तैयारियां समय पूर्व करा लेने का द्योतक है। किसान तेजी के साथ फसलें काटकर मेला स्थल को खाली कराने में जुटे हुए हैं।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला

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