धन्वंतरी दिवस पर किया आयुर्वेदिक दिवाली मनाने का आह्वान

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आयुर्वेद न केवल एक प्राचीनतम चिकित्सा विधा, बल्कि सम्पूर्ण जीवन जीने की कला है.
आयुर्वेद प्रकृति के साथ हमारे संबंध को और भी प्रगाढ़ करता है। प्रकृति के पंचमहाभूतों के साथ तारतम्य स्थापित कर स्वास्थ्य व सम्रद्धि की प्राप्ति की जा सकती है। इसलिए इस दिवाली को ख़ास आयुर्वेदिक तरीके से मनाकर हम धरती को प्रदूषण मुक्त बनाने में अपनी सहभागिता दर्ज करा सकते हैं।

उक्त विचार जिंदल हॉस्पिटल के प्रबंध निदेशक डॉ. बीएस जिंदल ने चतुर्थ राष्ट्रीय आयुर्वेद एवं धन्वन्तरि भगवान के प्राकट्य दिवस के अवसर पर जिंदल हॉस्पिटल में आयोजित कार्यक्रम में अध्यक्षता करते हुए व्यक्त किये।

डॉ. बीएस जिंदल ने बताया कि भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने इस वर्ष आयुर्वेद दिवस पर- “दीर्घायु के लिए आयुर्वेद” थीम निर्धारित की है। हमारी संकृति में वर्णित “जीवेम शरदाम शतम” की परिकल्पना की प्राप्ति करना केवल आयुर्वेद को दैनिक जीवन में अपनाकर ही संभव है। धनतेरस अर्थात धनवंतरी जयंती के इतिहास के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि आज ही के दिन समुद्र मंथन से अमृत कलश लिए भगवान श्री धन्वन्तरि जी का प्राकट्य हुआ था। जिन्हें चिकित्सा जगत का पिता कहा जाता है।

कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद के चैयरमैन राजेश सैनी को नगर को प्रदूषण मुक्त बनाने के किये जा रहे प्रयासों हेतु शाल उढ़ाकर सम्मानित किया।

उन्होंने जिंदल हॉस्पिटल में आयुर्वेद के प्रचार, प्रसार हेतु अनेकों कार्यक्रमों के आयोजनों पर भी प्रसन्नता जाहिर की। मुख्य अतिथि के रूप में पधारे चैयरमैन ने अपने उद्बोधन में कहा कि जिंदल हॉस्पिटल पिछले करीब 40 वर्षों से सामाजिक, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं आध्यात्मिक आदि अनेक क्षेत्रों में प्रशंसनीय कार्य कर रहा है। उन्होंने धनौरा के उत्थान के लिए किये जा रहे प्रयासों हेतु नगर पालिका की ओर से जिंदल परिवार को धन्यवाद दिया।

पोलैंड से पधारीं बाल मनोवैज्ञानिक व योग शिक्षिका योअन्ना गावृल्चिक ने कहा कि आयुर्वेद न केवल एक प्राचीनतम चिकित्सा विधा, बल्कि सम्पूर्ण जीवन जीने की कला है। उन्हें बहुत ख़ुशी है कि भारत सरकार की आयुर्वेद दिवस मनाने की इस पहल से सम्पूर्ण विश्व में आयुर्वेद का एक नवीन सूर्य उदय हुआ है, लेकिन भारत देश को अपनी इस अति प्राचीन जीवन पद्धति को विश्व में पुनर्स्थापित करने हेतु ओर अधिक गंभीर प्रयास करने होंगे। उन्होंने आशा जाहिर की, कि आने वाले दिनों में यूरोपियन देशों में भी आयुर्वेद के शोध केंद्र, औषधि निर्माण व चिकित्सालयों का निर्माण वृहद रूप में होगा, जिसमें भारत को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि ने उन्हें शॉल उढाकर सम्मानित किया।

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कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पोलैंड में कार्यरत हॉस्पिटल के चिकित्सक डा. दिलबाग जिंदल ने कहा कि आज आयुर्वेद का अंगीकरण वैश्विक स्तर पर हो रहा है। यूरोप में आयुर्वेदिक प्रसार के अपने अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों के लोगों का रुझान आयुर्वेद एवं योग के प्रति दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है, जो बहुत ही शुभ संकेत है।

पोलैंड में ही कार्यरत हॉस्पिटल की बालरोग विशेषज्ञ डॉ. राधा जिंदल ने कहा कि उन्हें अपने देश की इस सांस्कृतिक धरोहर को दुसरे देशों में फैलाते हुए गर्व का अनुभव होता है।

इस अवसर पर जिंदल हॉस्पिटल की ओर से नगरवासियों से इस दिवाली को आयुर्वेदिक रीति से मनाने की अपील की। प्रकृति के पंच तत्वों (पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु एवं आकाश) को प्रदुषण मुक्त करने में सहयोग प्रदान करने की अपील की।

कार्यक्रम में दीपक जलाकर विधि-विधान से मंत्रोच्चारणों के साथ भगवान धनवंतरी की पूजा की गयी व सूचनापत्र का विमोचन किया, जिसमें नगरवासियों से नगर पालिका परिषद को सहयोग प्रदान करने का अनुरोध किया गया।

इस अवसर पर डॉ. कृष्णदेव जिंदल, डॉ. तान्या, महिपाल सिंह, कमलेश जिंदल, अमायरा, अरविंद अग्रवाल, प्रणव, अर्पित गुर्जर, कपिल कुमार, अभिषेक कुमार, संजीव सैनी, विनोद सिंह, बिजेंद्र सिंह, प्रियंका चौहान, सावित्री देवी आदि अनेक लोग उपस्थित रहे।

-टाइम्स न्यूज़ धनौरा.

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