'अलग प्रदेश बना तो यहां विकास कई गुना तेजी से होगा’

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पश्चिमी यूपी राज्य की मांग को बैनर-पैम्पलेट-गोष्ठियों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाएगा.
उत्तम प्रदेश निर्माण संगठन के सदस्यों ने सरकड़ा गांव में कार्यशाला आयोजित कर 22 जिलों के पश्चिमी उत्तर प्रदेश को अलग राज्य गठन की मांग की। कहा कि यदि अलग प्रदेश बन गया तो यहाँ का विकास कई गुना तेजी से होगा।

बैठक को सम्बोधित करते हुए संगठन की रिसर्च विंग के अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने कहा यूपी 24 करोड़ जनंसख्या और 75 जिलों के कारण इतना बड़ा प्रदेश बन गया है कि यहाँ के लोगो को सरकारी सुविधाओं, शिक्षा, रोजगार, चिकित्सा की मूलभूत जरूरतें भी पूरी नहीं हो पा रही हैं जहाँ दूसरे छोटे राज्य खेल, साहित्य, व्यापार में झंडे गाड़ रहे हैं ऐसे में पश्चिमी यूपी के लोग सड़क, अस्पताल, विश्वविद्यालय, रोजगार, कानून व्यवस्था के लिए परेशान हैं।

भाकियू के अध्य्क्ष राधेश्याम ने कहा कि सबसे ज्यादा पैसा कमाकर हमारे पश्चिम से यूपी को दिया जाता है। हमारा क्षेत्र गन्ने का विशाल भंडार प्रदेश को देता है लेकिन बदले में किसान भुगतान के लिए सरकार के सामने गिड़गिड़ाने को मजबूर है। 72 फीसदी रेवेन्यू देने वाले पश्चिम प्रदेश को बजट में विकास के लिए मात्र 18 फीसदी धनराशि किस तरह की तरक्की है।

यूथ विंग के महासचिव ललित राठी ने एक करोड़ जनंसख्या का उत्तराखंड और ढाई करोड़ जनंसख्या का हरियाणा अलग प्रदेश बन सकता है तो आठ करोड़ की आबादी वाला पश्चिमी उत्तर प्रदेश अलग राज्य क्यों नहीं बन सकता।

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यूथ विंग जिलाध्यक्ष अंकुर सेठी ने कहा कि पूरे प्रदेश में 18 यूनिवर्सिटी हैं जिसमें सिर्फ तीन ही 22  जिलों की आठ करोड़ जनंसख्या को संभाल रही हैं। सरकारी स्वास्थ्य सेवाएँ बेहद लचर होने के बावजूद दोनो एम्स पूर्वांचल को दिए और तो और आईआईटी, आईआईएम और पांच सेंट्रल यूनिवर्सिटी भी पूर्वांचल में बनाई, यह सरकारों का क्षेत्रवाद नहीं तो क्या है। हाइकोर्ट की एकमात्र बेंच को भी लखनऊ में देना पश्चिमी यूपी के साथ दोगला व्यवहार करना ही है।

अमित चौधरी ने कहा कि हमारी खड़ीबोली की पहचान और संस्कृति को कायम रखने के लिए पश्चिमी यूपी के अलग राज्य का गठन जरूरी है।

मीडिया छात्र आयुष अग्रवाल ने कहा कि पश्चिमी यूपी के लोगों के लिए राजधानी 450 किमी है जहाँ किसी भी कार्य को दो दिन लग जाते हैं तो न्याय प्राप्त करने के लिए हाइकोर्ट की दूरी 850 किमी होने के कारण समय और धन दोनों की बर्बादी होती  है। बड़ा राज्य होने के कारण युवाओं के पास रोजगार ही नहीं है।

संगठन ने तय किया कि तिगरी मेले में पश्चिमी यूपी राज्य की मांग को बैनर, पैम्पलेट और गोष्ठियों के माध्यम से लोगों तक पहुंचाया जाएगा। कार्यशाला का आयोजन राधेश्याम सिंह व मंजीत चौधरी ने कराया।

कार्यशाला में रामसरन सिंह, हरपाल सिंह, महावीर, हरनाम, जयपाल सिंह, सतवीर सिंह, कपिल सिद्धू, समरपाल, देवेंद्र सिंह, जितेंद्र आदि रहे।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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