गजरौला के उद्योग भी मंदी की चपेट में, ट्रांसपोर्टर और मजदूरों का रोजगार प्रभावित

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छंटनी के बाद चार की जगह तीन लोगों से काम लिया जा रहा है जबकि वेतन नहीं बढ़ाया गया.
यहां स्थित अधिकांश औद्योगिक इकाईयां भी कारोबारी सुस्ती की गिरफ्त में हैं। छोटी इकाईयों के साथ ही जुबिलेंट तथा टेवा जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनियों में सुस्ती का प्रभाव है। आरएसीएल गेयर टेक और एएसपी में उत्पादन मांग कम होने से कम किया जा रहा है। टेवा में बीते तीन वर्षों में अनेक कर्मचारियों की छंटनी की गयी है।

जुबिलेंट के एक वरिष्ठ अधिकारी सुनील दीक्षित के मुताबिक उनकी कंपनी पर मंदी का कम असर है जिससे छंटनी की नौबत नहीं है। बड़े ट्रांसपोर्टर स. हरभजन सिंह का कहना है कि रौनक के उत्पादों की मांग घटी है। इससे ट्रांसपोर्टरों का कारोबार भी सुस्त है। नगर के ट्रांसपोर्टरों पर स्थानीय उद्योगों में आयी सुस्ती का बड़ा असर पड़ा है।

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एएसपी के मजदूरों को समय से वेतन नहीं मिलने से बढ़े विवाद में दर्जनों मजदूरों का गेट बंद कर दिया गया। यहां के पेपर मिलों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं।

टेवा एपीआई(इंडिया) नामक दवा कंपनी में सेवारत कर्मचारियों का कहना है कि बीते तीन वर्षों से यहां छंटनी का सिलसिला जारी है। इस विश्वस्तरीय कंपनी का अधिकांश उत्पादन विदेशों तक जाता है। यहां सबसे कम स्थानीय लोगों को रोजगार दिया गया है। छंटनी के बाद काम कर रहे लोगों का काम बढ़ गया है। कर्मचारियों का कहना है कि चार की जगह तीन लोगों से पूरा काम लिया जा रहा है। जबकि वेतन नहीं बढ़ाया गया। छंटनी के भय से कर्मचारी कुछ नहीं कह पाते। उधर प्रबंधतंत्र मंदी में घटते लाभांश को गिरने से बचाने को कम से कम लोगों से ज्यादा काम ले रहा है।

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यहां जुबिलेंट लाइफ साइंसेज, टेवा एपीआई(इंडिया) लि., आरएसीएल गेयर टेक, कौशाम्बी पेपर मिल, कोरल न्यूज़ प्रिंट, कामाक्षी पेपर्स, एएसपी, इराकेम लि., केमचूरा, तिरुपति टैक्सटाइल्स लि. आदि दो दर्जन बड़ी-छोटी इकाईयां स्थित हैं जबकि श्री एसिड्स लि., बैस्ट बोर्ड लि., रतन वनस्पति, सिद्धार्थ स्पिन फैब, एसएस ड्रग्स, गुरुमेक्स बियरिंग आदि फैक्ट्रियां कभी की बंद हो गयीं। जिससे हजारों लोगों का रोजगार गया और हजारों बीघा उपजाऊ कृषि भूमि कंकरीट के जंगल में तब्दील हो गयी।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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