'हर पल सांस में कितना ज़हर हम अपने भीतर समेट रहे हैं'

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यह शर्म की बात है कि दुनिया के 30 सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में 20 से अधिक भारत में हैं.
हवाएं आजकल ऐसी हो चली हैं कि यदि आप सिगरेट का कश नहीं लगाते, तो भी हवा में इतना जहर है कि दूषित हवा आपकी सांस में जा रही है। दिल्ली ही नहीं उत्तर भारत के कई हिस्सों में हवा जहरीली होती जा रही है। हर रोज बिना सिगरेट पिए भी हम कई सिगरेट के बराबर धुंआ अपने फेफड़ों में समेट रहे हैं। यह बेहद घातक है।

यह हमारी उम्र कम कर रहा है। हमें धीरे-धीरे मार रहा है। हमें पता नहीं चल रहा और जहर हमारी सांस से शरीर में प्रवेश कर रहा है।

यह बेहद शर्म की बात है कि दुनिया के 30 सबसे अधिक प्रदूषित शहरों में 20 से अधिक भारत में हैं। ऐसा एक रिपोर्ट नहीं कहती, अलग-अलग रिपोर्ट यह दावा करती रही हैं कि भारत में प्रदूषण लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकार द्वारा इस ओर से किस तरह के प्रयास किए गये हैं, यह हर कोई जानता है। यदि प्रयास किए जाते तो प्रदूषण में कुछ कमी तो आती, मगर ऐसा हुआ ही नहीं। बल्कि प्रदूषण का स्तर हर साल विकराल होता जा रहा है। एनजीटी का शोर होता रहता है, जुर्माना लेकर वह भी औद्योगिक इकाइयों को भूल जाती है। इसका उदाहरण गजरौला में देखने को मिल चुका है। यानी जुर्माना लगाकर सब माफ।

एयर क्वालिटी सूचकांक (AQI) पर नज़र डालें तो दिल्ली में कुछ जगह यह स्तर हजार के पास पहुंचा, जबकि सुरक्षित स्तर 50 से नीचे माना जाता है। इससे साफ हो जाता है कि हमारी यहां हवा में कितना ज़हर है।

मुरादाबाद, अमरोहा, गजरौला, हसनपुर, रामपुर, बिजनौर, हापुड़ आदि का एयर क्वालिटी इंडेक्स 100 से अधिक ही रहा है। 150-200 के बीच भी रहता है। इससे साफ हो जाता है कि हम जिस हवा में सांस ले रहे हैं, वह कितनी खतरनाक है। हमें सड़क दुघर्टनाओं से, दूसरी बीमारियों से इतना खतरा नहीं, जितना वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से खतरा है। यह न दिखने वाला घातक ज़हर चौबीस घंटें हम पर हमला कर रहा है। हर पल सांस में कितना विष हम अपने भीतर समेट रहे हैं। 

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एक रिपोर्ट के मुताबिक हर साल दिल्ली में 10 से 30 हजार लोग वायु प्रदूषण से होने वाली बीमारियों से मर रहे हैं। जबकि आईआईटी मुंबई और दुनिया के कुछ संस्थानों के शोध के मुताबिक दिल्ली में सालाना मौतों का आंकड़ा 15 हजार के करीब है।

स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण की वजह से 2017 में मरने वाले लोगों का आंकड़ा 12 लाख के करीब था।

भारत में हर तीन मिनट में वायु प्रदूषण से हो रही बीमारियों से एक बच्चे की मौत हो रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक 2017 में करीब 2 लाख बच्चों की मौत हुई। मतलब यह कि हर रोज़ करीब साढ़े पांच सौ बच्चों की मौत। यह आंकड़े चौंकाते हैं।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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