बिजली मीटर में बिजली वालों की हठधर्मी : शांति व्यवस्था को चुनौती बने बिजली अधिकारी

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अफसरशाही के कारनामों के कारण बिजली विभाग लगातार घाटे में जा रहा है.
बिजली अधिकारी और उनके संविदा ठेकेदारों की मिलीभगत से जहां उपभोक्ताओं को परेशान किया जा रहा है वहीं महकमे को ही चुना लगाया जा रहा है। कुछ काम निगम और कुछ काम ठेकेदारों को सौंपकर दिक्कतों को और बढ़ाया गया है। उपभोक्ताओं का कहना है कि या तो बिजली पूरी तरह निजी हाथों में सौंपी जाए अथवा पूरी तरह से सरकार संभाले।

नए बिजली मीटर लगाने की प्रक्रिया बिजली महकमे के अफसरों की देखरेख में ठेकेदारों से कराई जा रही है जिसमें बिजली विभाग की ओर से मनमानी शर्तें थोपी जा रही हैं। यह सब बिजली महकमे में भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और उपभोक्ताओं को ठगने के लिए सुधार के बहाने किया जा रहा है। लगता है विभाग में सुधार लाने के बजाय अवैध कमाई करने के हथकंडे खोजने को सलाहकार नियुक्त किए हैं। भ्रष्ट अधिकारियों की तानाशाही के कारण सरकारी विभागों पर बकाया भारी-भरकम राशि को वसूलने के बजाय ईमानदार उपभोक्ताओं पर दबाव बनाने पर पूरा जोर लगाया जा रहा है। अफसरशाही के कारनामों के कारण बिजली विभाग लगातार घाटे में जा रहा है जिसको कम करने के नाम पर बार बार बिजली दरें बढ़ायी जा रही हैं। हालत यह हो गई है कि उत्तर प्रदेश देश में सबसे महंगी बिजली देने वाला प्रदेश बन गया है।

नये बिजली मीटर लगाने में उपभोक्ताओं को परेशान करने और लोगों में अनावश्यक अशांति का माहौल उत्पन्न करने का काम किया जा रहा है। मीटर में मामूली खराबी पर नए मीटर लगवाये जा रहे हैं। यह तो ठीक है लेकिन मीटर लगवाने के स्थान पर मनमानी उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द का कारण बन रही है। नए मीटर मकान की बाउंड्री के बाहर सड़क की तरफ लगाए जा रहे हैं जहां वे पूरी तरह असुरक्षित हैं। तंग गलियों में यह और भी असुरक्षित हैं। कोई भी सिरफिरा व्यक्ति या शरारती बच्चा उसे तोड़ सकता है। नगर में बंदरों की टोलियां उछलकूद करती हैं। वे उसे उखाड़ कर क्षतिग्रस्त कर सकते हैं। कई वाहन इस तरह लदे होते हैं जो दीवारों से रगड़कर चलते हैं। जिनकी चपेट में आकर दीवार पर लगा मीटर क्षतिग्रस्त हो सकता है। इससे आग भी लग सकती है।

कई बार गलतफहमी में लोग मीटर क्षतिग्रस्त होने पर किसी बेकसूर पड़ोसी से उलझ सकते हैं। शरारती तत्व भड़काने के लिए मीटर तोड़ने का काम कर सकते हैं। इससे शांति भंग का खतरा उत्पन्न हो सकता है। मीटर टूटने से भंग शांति में बेकसूर लोगों के खिलाफ पुलिस 151 में कार्रवाई करने में स्वतंत्र है। जबकि इसमें जबरन मीटर लगवाने वाले बिजली वालों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए परंतु उन्हें आरोपी बनाने का नियम ही यहां लागू नहीं होगा।

मीटर लगाने के बाद उपभोक्ता से उस पत्र पर हस्ताक्षर करा लिए जाते हैं जहां लिखा होता है कि मीटर की सुरक्षा और रखरखाव का दायित्व उपभोक्ता का होगा। इस सवाल का जवाब उपभोक्ता को नहीं दिया जाता कि क्या वह मीटर रखाने के लिए 24 घंटे मीटर के पास ही बैठा रहेगा?

पिछले दिनों डॉ. प्रमोद प्रभाकर का मीटर किसी ने तोड़ कर नष्ट कर दिया। उन्हें दोबारा दूसरे मीटर की कीमत देकर नया मीटर लगवाना पड़ा। वे परेशान हैं कि कहीं फिर कोई सिरफिरा मीटर ना तोड़ दे।

मीटर लगाते समय दौ सौ रुपये प्राइवेट कर्मचारी लेता है तथा मीटर बनाने वाली कंपनी का मीटर भी बिकता है। मीटर निर्माता कंपनी को लाभ पहुंचाने के लिए भी अधिकारियों ने यह नया तरीका निकाला हो सकता है। उधर मीटर टूटने से नया लगने तक उपभोक्ता के घर बिजली नहीं रहती। बिजली वालों के पास बार—बार भागने पर मीटर लगाने में अनावश्यक देरी की जाती है ताकि परेशान होकर वह सुविधा शुल्क देने को बाध्य हो। बाबू, जेई से एसडीओ तक सभी एक सुर में बात करते हैं। यदि घर की बाउंड्री के अंदर मीटर लगेगा तो उपभोक्ता का शोषण करने का बहाना नहीं मिलेगा। साथ ही वह उपरोक्त दिक्कतों का सामना करने से भी बचा रहेगा।

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घरों से बाहर जबरन लगाये जा रहे बिजली मीटर

बिजली मीटर चोरी की घटनायें जारी हैं और बिजली विभाग के अफसर धींगामुश्ती के बल पर उन्हें जबरन घरों से बाहर लगवा रहे हैं। इससे उपभोक्ता परेशान हैं। लोगों के अनुरोध को दरकिनार कर नयी समस्या उत्पन्न करने में बिजली वालों को आनन्द आ रहा है। एक महिला ने पिछले दिनों मीटर चोरी की घटना की तहरीर थाने में दी थी। जबकि इससे पूर्व मीटर चोरी और तोड़फोड़ की घटनायें सामने आ चुकी हैं।

मोहल्ला बस्ती निवासी लक्ष्मी देवी पत्नी जसवंत सिंह ने थाने में तहरीर दी कि घर के बाहर दीवार पर लगा उसका बिजली मीटर चोरी हो गया। पुलिस ने महिला को घटना स्थल की जानकारी लेकर आगे की कार्रवाई का भरोसा दिलाया।

इससे पूर्व नेत्र चिकित्सक प्रदीप दिवाकर के मकान के बाहर लगा बिजली मीटर तोड़ दिया गया। उन्होंने मीटर लगाते समय बाउंड्री वाल के अंदर लगाने को कहा था। उनकी बात नहीं मानी गयी, बिजली विभाग के जिद्दी अधिकारियों की गलती का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ा।

नगर में दिन दहाड़े मकानों के ताले तोड़कर चोरी की घटनायें भी होती रहती हैं। ऐसे में रास्तों और गलियों में दीवारों पर लगे बिजली मीटर भला कैसे सुरक्षित रह सकते हैं। एसडीओ आरपी सिंह का मजेदार तर्क है -वे कहते हैं कि मीटर छह-सात रुपये से ज्यादा का कबाड़ा है, वैसे भी कोई कबाड़ी उसे नहीं खरीदेगा। यह बात अपनी जगह ठीक है लेकिन कई शरारती तत्व अपने लाभ के बजाय दूसरे को क्षति पहुंचाने में संलग्न रहते हैं। हर मोहल्ले में आपसी विवाद हैं। ऐसे में यह स्थिति उन्हें और बढ़ाती है। मीटर बाहर लगाने से केवल मीटर बनाने वाली कंपनी को लाभ है। चोरी और तोड़फोड़ से कंपनी के मीटरों की बिक्री बढ़ती है। विभाग को इस नियम को बदलकर   चाहरदीवारी के अंदर मीटर लगाने चाहिए। 

नगर के तमाम उपभोक्ताओं ने विभाग के आला अफसरों से मांग की है कि मीटर लगाने की नीति बदली जाये। उपभोक्ताओं को परेशान करने वाले नियमों के बजाय उनकी सुविधाओं को प्राथमिकता दी जाये। इस तरह की मांग करने वालों में डॉ. श्याम सिंह, अरविन्द अग्रवाल, कपिल कुमार गोयल, सोनू कश्यप, डॉ. जाफिर हुसैन, स. कुलवंत सिंह, अनिल कुमार अग्रवाल, हरीशंकर धूपवाले, नरेन्द्र सिंह, धीरेन्द्र कुमार, सुरेन्द्र सिंह और रामकृष्ण चौहान आदि मौजूद रहे।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.

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