गंगा के सौन्दर्यीयकरण के पक्ष में गजरौलावासी

ganga-river-gajraula-tigri
क्षेत्र के सजग बुद्धिजीवी और सामाजिक सरोकारों से जुड़े अनेक गणमान्यों ने इसके लिए अपने विचार दिये.
गंगा यात्रा कार्यक्रम के संचालकों को तिगरी को पर्यटक स्थल बनाने की ओर ध्यान देना चाहिए। ब्रजघाट और तिगरी के गंगा तटीय क्षेत्र का विकास करके उसे धार्मिक पर्यटक स्थल का रुप देने की चरचा डेढ़ दशक से कई बार हुई है। इसके लिए केन्द्रीय और राज्य के संबंधित मंत्रालयों की ओर से सकारात्मक कार्रवाई के संकेत भी मिले हैं लेकिन केवल ब्रजघाट में हरिद्वार की तर्ज पर गंगा की आरती आदि का स्थान बनाकर उसके बाद कुछ नहीं हुआ।

गजरौला का बुद्धिजीवी एवं सजग वर्ग पवित्र गंगा नदी को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त देखना चाहता है। तिगरीधाम और ब्रजघाट को पयर्टन स्थल बनाया जाना चाहिए।

इस मुद्दे पर गजरौला टाइम्स से अपने विचार बांटे सामाजिक चिंतकों और सजग नागरिकों ने...

'सांस्कृतिक सभ्यता की गवाह है गंगा’ -डॉ. श्याम सिंह

नगर के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. श्याम सिंह हमेशा क्षेत्रीय विकास के पक्षधर रहे हैं। उन्होंने गंगानदी के निकटवर्ती क्षेत्र की ऐतिहासिक पृृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बताया कि ब्रजघाट से लेकर तिगरी तक का क्षेत्र भारतीय संस्कृति और सभ्यता का ठोस गवाह है। यहां प्राचीन काल से हिन्दू अनेक धार्मिक कर्मकाण्डों और रीति रिवाजों का निर्वहन करते आ रहे हैं।

डॉ. श्याम सिंह का कहना है कि भारत के लोग यहां मृतकों की अस्थियां गंगा में प्रवाहित करने आते है। प्रतिवर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर मिनी कुम्भ जैसा मेला भी यहां लगता है।

अतः यह स्थान पवित्र धार्मिक क्षेत्र होने के साथ-साथ बेहतर पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाये तो बहुत अच्छा रहेगा। इसके लिए स्थानीय जागरूक लोगों को अपनी आवाज बुलन्द करनी चाहिए।

'इससे अनेक रोजगार के साधन बढ़ेंगे’ -स. हरभजन सिंह

ट्रांसपोर्टर स. हरभजन सिंह ने बताया कि ब्रजघाट से लेकर तिगरी तक के क्षेत्र को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाये तो यहाँ कई तरह के रोजगारों का सृजन होगा, जिसमें होटल, रेस्तरां, ढाबे और रेस्टोरेंट के साथ ट्रांसपोर्टरों का कारोबार फैलेगा। इससे स्थानीय नवयुवकों को रोजगार के अवसर मिलेंगे। चिकित्सा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी काम मिलेगा जिससे क्षेत्र का विकास होने से समृद्धि दिखाई देगी।

हरभजन सिंह ने कहा कि सौन्दर्यीकरण और हरियाली से पर्यावरण भी शुद्ध रहेगा। ऐसे में गंगा की सफाई सबसे आवश्यक है। घाटों को साफ-स्वच्छ बनाये रखने और मृतकों का दाह संस्कार करने की व्यवस्था में भी बदलाव जरूरी है। गजरौला के लोगों को भी इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। हम सभी को मिलकर इसके लिए प्रयास करना होगा।

'यहां आवागमन की बेहतर सुविधायें हैं’ -डॉ. निर्मला आर्य

महिला चिकित्सक एवं किसान आदर्श इंटर कालेज की प्रबंधक डॉ. निर्मला आर्य का मानना है कि पर्यटक स्थल बनाया जाना चाहिए।

उनका तर्क है कि रेल और सड़क मार्गों से जुड़ा यह क्षेत्र राष्ट्रीय राजधानी को कई राज्यों की राजधानियों और देश के प्रमुख नगरों से भी जोड़ता है। ऐसे में ब्रजघाट और तिगरी को गजरौला के साथ मिलाकर एक सुन्दर पर्यटक स्थल का रूप दिया जा सकता है।

डॉ. आर्य का कहना है कि नगर और क्षेत्र के लोगों को जनप्रतिनिधियों पर दबाव बनाना चाहिए जिससे कि वे इस दिशा में कार्यवाही करा सके। गंगा का तटवर्ती क्षेत्र विकसित कराये जाये तो यहां एक सुन्दर पर्यटक स्थल बन सकता है।

वे कहती हैं कि क्षेत्र को इससे रोजगार मिलेगा तथा विकास होगा।

'गंगा की सफाई और श्रंगार जरुरी’ -चौ. वीरेन्द्र सिंह

पूर्व जिला पंचायत सदस्य चौ. वीरेन्द्र सिंह भी गंगा तटवर्ती क्षेत्र के विकास पर सहमति व्यक्त करते हैं। उनका कहना है कि गंगा नदी भारतीय समाज की मुक्तिदायिनी मानी जाती है। यही कारण है कि विभिन्न पर्वाें आदि पर भारी संख्या में लोग स्नान करने आते हैं। जन्म से मृत्यु तक कई बार यहाँ हाजिरी देने आया जाता है बल्कि मृत्योपरान्त भी हमारे संस्कार यहीं होते हैं। ऐसे में भारतीयों का गंगा से जन्म-जन्मांतरों का नाता है। इतनी महत्वपूर्ण और पूज्नीय नदी के स्थान का सौन्दर्यीकरण कर उसे धार्मिक पर्यटक स्थल का रूप प्रदान करना कल्याणकारी कार्य होगा।

वीरेन्द्र सिंह ने कहा कि इसके लिए हम सभी को एकताबद्ध होकर कोशिश करनी होगी। दूसरों को प्रेरित करना होगा ताकि क्षेत्र के लिए कुछ बेहतर किया जा सके। टाइम्स द्वारा उठायी आवाज को हमें दूर तक ले जाना होगा। इसी से हमारा और हमारे क्षेत्र का कल्याण और विकास होगा। गंगा की सफाई और श्रंगार समय की जरूरत है।

ganga-river-gajraula-tigri-picture

'हरिद्वार की तरह तीर्थ ब्रजघाट’ -रामकृष्ण चौहान

कृष्णा पब्लिक स्कूल के स्वामी और भाजपा नेता रामकृष्ण चौहान ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि ब्रजघाट का महत्व धीरे-धीरे हरिद्वार तीर्थ की तरह होता जा रहा है। यहाँ से शिवरात्री पर भारी संख्या में लोग कांवड लेने आते हैं। अन्तिम संस्कार और अनेक धार्मिक संस्कार आदि सम्पन्न कराने वालों का तांता लगा रहता है। प्रत्येक पूर्णिमा, अमावस्या तथा अन्य पर्वो पर ब्रजघाट और तिगरी में स्नान करने वालों की अथाह भीड़ उमड़ती है। यह जन सैलाब ही यहाँ की पवित्र भूमि के महत्व का अहसास कराने का सबसे बड़ा प्रमाण है। पर्यटक स्थल बनाने को यहाँ का गंगा तटीय क्षेत्र बहुत ही सटीक है। इसलिए यहॉ अतिशीघ्र सौन्दर्यीकरण कराकर सुन्दर धार्मिक पर्यटक स्थल बनाया जाना चाहिए।

'प्राकृतिक वातावरण यथावत रहेगा’ -डॉ. वी.एस. जिन्दल

मण्डी धनौरा के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. वी.एस. जिन्दल चाहते हैं कि ब्रजघाट के साथ ही मण्डी धनौरा, रजबपुर और अमरोहा को भी इसमें जोड़ा जाये तो बेहतर होगा।

उन्होंने बताया कि खादर की काली ढाब झील और मण्डी धनौरा में महादेव मन्दिर का कमल तड़ाग उपेक्षा के शिकार होकर अपना अस्तित्व खोने को हैं। इनकी सुरक्षा और सौन्दर्य को लौटाया जाये तो यह बहुत ही बेहतर होगा क्योंकि दोनों ही स्थानों पर सुन्दर कमल उगते थे जो धीरे-धीरे मौत के कगार पर हैं। पर्यटक स्थल बनने पर ही इन स्थानों का उद्धार संभव है।

डॉ. जिन्दल ने यह मुद्दा उठाने पर गजरौला टाइम्स का आभार जताया। साथ ही उन्होंने कहा कि इस तरह के सामाजिक मुद्दे उठाने से क्षेत्र प्रगति की राह पर अग्रसर होता है तथा समाज में अच्छा संदेश जाता है।

'राज्य में पर्यटक स्थलों का अभाव’ -अरविन्द अग्रवाल

दूर-दूर तक स्वादिष्ट मिष्ठानं के लिए विख्यात और जागरूक नागरिक अरविन्द अग्रवाल का कहना है कि उत्तराखण्ड के प्रदेश से अलग होकर नये राज्य का रूप लेने से मौजूदा उत्तर प्रदेश में धार्मिक पर्यटक स्थलों का अभाव हो गया है। यदि यहाँ विकास करके क्षेत्र को एक सुन्दर धार्मिक पर्यटक स्थल का रूप प्रदान किया जाये तो बहुत ही अच्छा रहेगा। इससे गंगा का किनारा सुरक्षित और सुरम्य हो जायेगा तथा पूरे क्षेत्र के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा साथ ही गजरौला का नाम विश्वभर में फैल जायेगा। गजरौला से ब्रजघाट और तिगरी तथा तिगरी से ब्रजघाट तक का त्रिभुजाकार क्षेत्र विकसित क्षेत्र का रूप धारण कर सकता है।

अरविन्द अग्रवाल इसके लिए जनचेतना के साथ एकजुट होकर आवाज उठाने की वकालत करते हैं।

'सभी के प्रयास से काम होगा’ -अशोक कश्यप

ज्ञान भारती इण्टर कालेज गजरौला के वरिष्ठ प्रवक्ता अशोक कश्यप चाहते हैं कि क्षेत्रीय नेताओं, बुद्विजीवियों, समाज सेवियों और जागरूक युवकों को मिलकर इस दिशा में ठोस कार्यवाही के लिए एक नीति  बनानी चाहिए। उसके बाद राज्य और केन्द्रीय सरकारों के सामने यह मांग रखनी चाहिए।

उन्होंने टाइम्स की पहल का स्वागत करते हुए कहा कि इसके लिए सभी अखबारों को प्रयास करना चाहिए। कश्यप ने भरोसा जताया कि हम सब लोग मिलकर कोशिश करेंगे तो हमारा क्षेत्र एक बेहतर धार्मिक पर्यटक स्थल बन सकता है।

अशोक कुमार कश्यप का मानना है कि इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन भी होगा।

ganga-river-gajraula-tigri-brijghat

'यहाँ कई धार्मिक स्थल हैं’ -हाजी अब्दुल सलाम

अध्यापक और समाजसेवी हाजी अब्दुल सलाम का कहना है कि हमारा क्षेत्र गंगा-जमुनी तहजीब और साम्प्रदायिक सौहार्द का नमूना है। यहां ब्रजघाट और तिगरी से हिन्दू-मुस्लिम दोनों का जुड़ाव  है। इसी के साथ रजबपुर की हजरत बाबा फरीदी की दरगाह और अमरोहा की भूरेशाह की मजार पर भी सभी लोग एक साथ अकीदत पेश करने जाते है।

उनका कहना है कि कई और स्थान भी यहां ऐसे है जहां प्रेम और श्रृद्धा के साथ सभी वर्गाें के लोग एक साथ पहुंचते हैं। ऐसे में हम सभी चाहते हैं कि यहां बेहतर पर्यटक स्थल बने। इससे सभी वर्गाें के लोगों को लाभ होगा और रोजगार के अवसर बढ़ने से रोजी-रोटी की दिशा में मजबूती होगी। उन्होंने आशा व्यक्त की है कि हमारे भी जनप्रतिनिधि इसमें दलीय भावना से ऊपर उठकर प्रयास करेंगे जिससे हम यहां धार्मिक पर्यटल स्थल बनाने में कामयाबी हासिल कर सकें।

'सरकार ढांचागत सुविधायें दें’ -चौ. सोमवीर सिंह

श्री साई डिग्री कालेज के प्रबन्धक तथा गुरू जी के नाम से विख्यात चौ. सोमवीर सिंह चाहते हैं कि गंगा निर्मल हो और गजरौला से गंगा तक का क्षेत्र एक शानदार पर्यटक केन्द्र बनाया जाये। इसके लिए राज्य और केन्द्र सरकारों को ढांचागत सुविधायें उपलब्ध कराकर इस पुनीत कार्य को जल्दी से जल्दी शुरू कराया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि ऐसा नहीं किया जाता तो गंगा की सफाई में भी बाधा आयेगी।

उनका कहना है कि गजरौला, ब्रजघाट, तिगरी और इनके निकटस्थ खादर क्षेत्र में सड़कों, पार्काें और सुन्दर प्राकृतिक स्थलों को विकसित किया जाये। इससे खादर के दर्जनों गाँवों का बेहतर विकास होगा और क्षेत्र के लाखों युवा बेरोजगार काम की तलाश में बाहर जाने से बचेंगे। चौतरफा यातायात मार्ग और सुरक्षित क्षेत्र होने के कारण यहाँ तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की भीड़ जुट जायेगी, जिनके रहन-सहन, ठहराव, खान-पान, और मनपसंद वस्तुओं के व्यवसाय में भारी बढ़त होगी। दूर-दूर तक लोगों को काम और रोजगार मिलेगा।

'अन्य धार्मिक स्थल भी शामिल हों’ -नवीन गर्ग

व्यवसायी नवीन गर्ग भी क्षेत्र को पर्यटक स्थल बनाये जाने के पक्षधर हैं। उन्होंने सुझाव दिया कि गजरौला का ललिता मन्दिर, रजबपुर की शेख फरीद की मजार और अमरोहा का वासुदेव तीर्थ स्थल तथा भूरेशाह की दरगाह जैसे धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों को भी इसमें शामिल किया जाये तो बेहतर होगा। इन स्थलों पर दूर-दूर से भारी संख्या में श्रृद्धालु आते हैं। यह क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभायेगा।

नवीन गर्ग का यह भी कहना है कि गंगा तट के सौन्दर्यीयकरण से इसके आसपास के क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

~टाइम्स न्यूज़ गजरौला.