भाजपा ने अमरोहा के जाटों की ताकत को पहचाना

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अमरोहा ज़िले में भाजपा ने अपने संगठन में शीर्ष पद जाटों को दिए.
मुरादाबाद मंडल में बीते संसदीय चुनावों में सभी लोकसभा सीटें गंवाने के बाद भारतीय जनता पार्टी को शायद यह अहसास हो गया कि इस क्षेत्र में चुनावी समीकरण प्रभावित करने वाला जाट मतदाता उससे किनारा करने लगा है। हमने कई बार लिखा है कि भाजपा का प्रबल समर्थक जाट समुदाय भाजपा में उपेक्षित है। अमरोहा जनपद की चारों सीटों पर निर्णायक मतदाता इसी समुदाय के होने के बावजूद एक भी जाट को उम्मीदवार न बनाना तथा संगठन में भी महत्वपूर्ण पद न दिए जाने से बिरादरी में नाराजगी बढ़ रही थी। लोकसभा चुनाव में यहां भाजपा की पराजय का एक बड़ा कारण भी यही रहा।

लगता है भाजपा अपनी गलती समझ गयी और उसे सुधारने की भी कोशिश शुरु कर दी है। पहले जिला संगठन का नेतृत्व ब्रजेश चौधरी और अब जिला उपाध्यक्ष के पद पर वीरेन्द्र सिंह को मनोनीत कर जाट समुदाय को मनाने का ही प्रयास लगता है। इसी के साथ पार्टी ने एमएलसी (शिक्षक) के लिए डॉ. हरि सिंह ढिल्लो को मैदान में उतारा है।

डॉ. ढिल्लो मजबूत जनाधार वाले नेता हैं। पिछले एमएलसी चुनाव में उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रुप में भाजपा के डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त को कड़ी टक्कर दी थी।

जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर भी भाजपा की सरिता चौधरी कायम हैं। गजरौला विकास खंड पर भी भाजपा से धमेन्द्र सिंह लालू काबिज हैं। वैसे इन दोनों पदों पर इनका काबिज होना पार्टी के बजाय व्यक्तिगत ज्यादा है। लालू के लिए वीरेन्द्र सिंह ने अपना मजबूत दावा छोड़कर त्याग तथा पार्टी अनुशासन का काम किया था।

भले ही भाजपा ने जनपद में जाटों को महत्व के लिए कदम बढ़ाए हैं लेकिन जो महत्व इस बिरादरी के नेताओं को गैर भाजपा दलों के कार्यकाल में मिला यह उससे बहुत कम है। चौ. चन्द्रपाल सिंह, बाबू महेन्द्र सिंह, चौ. कांसीराम, चौ. समरपाल सिंह(अहरौला), चौ. समरपाल सिंह(भैड़ा भरतपुर), हरगोविन्द सिंह, चौ. नानक सिंह गिल, मुंशी भोला सिंह चाहल, इंदिरावती, गंगासरन सिंह, चौ. शौराज सिंह, होमपाल सिंह चाहल, मान सिंह चाहल, डॉ. हरि सिंह ढिल्लो, मनवीर सिंह चिकारा, आदि जाट नेता मंत्री, सांसद, विधायक, डीसीबी चेयरमैन, जिला पंचायत अध्यक्ष, इफको चेयरमैन, सहकारिता आदि के क्षेत्र में विभिन्न पदों पर गैर भाजपा दलों के शासन में चुने जाते रहे हैं।

भाजपा को दूसरे दलों की तर्ज पर जाट समुदाय को महत्व देना होगा। यह अच्छी शुरुआत है। इसका सकारात्मक संदेश जाना चाहिए। पंचायत चुनावों में देखना होगा कि भाजपा किस नीति पर चलेगी। 2022 के विधानसभा चुनावों के लिए भी उसे अभी से स्थिति स्पष्ट करनी होगी। सहकारी संस्थाओं के चुनाव भी आने वाले हैं। उसपर भी सभी की नज़र है।

~टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.