कोरोना- जांच की रफ़्तार बढ़ानी होगी

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मानव जीवन में यह भी एक नयी बीमारी शामिल हो गयी है, जो समय-समय पर अपना असर दिखाती रहेगी.
कोरोना जैसी बीमारी से पूरा विश्व भयभीत है। हमारे देश में भी यही स्थिति है। सबसे जटिल समस्या है कि इस बीमारी की अभी तक कोई दवाई नहीं बनी है। हालांकि कई देशों में दवाई तैयार करने की तमाम कोशिशें जारी हैं। यह सुनिश्चित नहीं है कि इस वायरस की मौत की दवा कब तक तैयार होगी। पिछले तजुर्बे बताते हैं कि मानव जीवन में यह भी एक नयी बीमारी शामिल हो गयी है, जो समय-समय पर अपना असर दिखाती रहेगी। इसके इलाज के लिए नये-नये अनुसंधान नयी-नयी दवायें उपलब्ध कराते रहेंगे। यह बीमारी हमारे साथ-साथ चलती रहेगी।

अभी तक हम जिसे उपचार मान रहे हैं वह उपचार नहीं बल्कि बीमारी से बचाव का तरीका है तथा शरीर को ऊर्जावान बनाकर उसमें रोगरोधी तत्वों को सशक्त बनाना है। जिससे शरीर सभी प्रकार के रोगों के खिलाफ लड़ने को तैयार हो सके। 
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सरकार द्वारा पूरे देश में लॉकडाउन कर वायरस के फैलाव को रोकने का जो प्रयास किया गया, वह उतना सफल नहीं हो सका, जितना होना चाहिए था। इसका मूल कारण जांच का काम बेहद सुस्त ढंग से चलना है। लगभग डेढ़ माह तक तमाम काम बंद रखने के बावजूद तेजी से जांच करने के संसाधन न तैयार कर पाना देश के शासन और प्रशासन की घोर विफलता/लापरवाही मानी जायेगी। दो सप्ताह का समय और बढ़ाना तथा संक्रमण के मामलों में हो रही बढ़ोत्तरी से पता चलता है कि मामला गंभीर है तथा मरीजों की संख्या लाखों में हो सकती है। कई जगह ढील दिए जाने से जरुरी जांच की रफ्तार तेज करना था। सरकार को इसे बहुत ही गंभीरता से लेना होगा।

-जी. एस. चाहल.