शराबियों की बहुत हमदर्द है सरकार : गजरौला में विरोध के बावजूद शराब की दुकानें बढ़ीं

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गजरौला में घुसने से पूर्व ही सड़कों के किनारे तो आप को दुकानें मिलेंगी ही बल्कि अंदर भी कई दुकाने हैं.
राज्य सरकार की ओर से ट्रॉमा सेंटर जैसी महत्वपूर्ण जरुरत और उच्च शिक्षा तथा प्रदूषण विरोधी योजना पर यहां भले ही अधिक ध्यान न दिया गया हो लेकिन नगर को शराब से सराबोर करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। लगता है सरकार दूसरी सभी जरुरतों से अधिक शराब आपूर्ति को महत्व देती है।

यहां कदम दर कदम शराब की इतनी दुकानें खोली गयी हैं कि नगर में घुसने से पूर्व ही सड़कों के किनारे तो आप को दुकानें मिलेंगी ही बल्कि अंदर भी कई दुकाने हैं। जिले के कई शहरों की आबादी गजरौला से अधिक हैं लेकिन शराब की दुकानों और शराब माफियाओं की तादाद उससे कहीं ऊपर है।

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चाहें हसनपुर मार्ग, चाहें नवादा की ओर से, चाहें सलेमपुर गोसाईं मार्ग से और भले ही धनौरा, तिगरी, दिल्ली अथवा मुरादाबाद की ओर से गजरौला में प्रवेश करें, सभी प्रवेश द्वारों पर सुरा-समुद्रों की सौगात के दर्शन उपलब्ध रहेंगे।

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गजरौला में अलग-अलग जगहों पर समय-समय पर 'शराब की दुकानों का विरोध होता रहा है.

फाजलपुर मोहल्ले में कई बार दुकानों का हल्का विरोध कुछ लोगों द्वारा होता है। लेकिन यहां से दुकानें हटने के बजय उनकी तादाद और बढ़ी है। यहां एक देसी शराब की दुकान थी, उसका विरोध हुआ। तो वह सड़क के दूसरी ओर यानी बायें से दायें क्रेशर के बराबर में और भी बड़े स्थान पर खोल दी। बाद में एक अंग्रेजी और एक बीयर की दुकान भी वहीं खोल दी गयी। अब फिर विरोध शुरु हुआ है। देखते हैं इस बार कौन-सा नया तोहफा मोहल्ले वालों को बख्शा जाने वाला है। यहां विरोध के पीछे राजनीति साधने के अलावा कुछ नहीं होता। यही कारण है दुकानें घटने या हटने के बजाय बढ़ती जाती हैं।

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-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.