गिलहरी की पूंछ से समंदर सुखाने की कवायद, पालिका ने जल निकासी को लगाया एक पम्पिंग सैट

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पालिका प्रशासन का जलनिकासी का यह करिश्माई तरीका केवल पालिका का खर्च बढ़ाने के अलावा कुछ नहीं.

मायापुरी मोहल्ले में गंदे जलभराव की खबर के बाद पालिका प्रशासन ने उसकी निकासी का मन बहलाऊ  प्रबंध तो कर दिया लेकिन इससे यहां बने सड़े पानी के तलाब का पानी कम नहीं होने वाला। हाल ही में  प्रदेश में स्वच्छता श्रेणी में प्रथम स्थान पाने वाली नगर पालिका के इस मोहल्ले की जमीनी हकीकत को जाकर समझने पर यहां इसके विपरीत स्थिति स्पष्ट होती है। 

गजरौला के कई मोहल्लों तथा बड़ी आबादी की गंदी नालियों का सड़ा हुआ जल मायापुरी दक्षिणी-पश्चिमी छोर पर रेलवे लाइन तक एक तालाब के रुप में एकत्र होता जा रहा है। लोगों के मकानों की बाउंड्री-वाल से सटा यह गंदे पानी का तालाब एक खेत और कई प्लांटों में भरा है। भाजपा नेता और पूर्व सभासद अनिल अग्रवाल का लगभग दो एकड़ का खेत भी इसी तालाब में समाहित है। जहां कोई भी फसल नहीं उगायी जा सकती। 

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तालाब के पानी में मक्खी, मच्छरों तथा दूसरे खतरनाक कीड़ों की भरमार है। सड़े पानी की दुर्गन्ध पूरी आबादी के नाक में दम किए है। तालाब के निकट बसी आबादी में दलित बहुसंख्यक हैं। जहां सड़कों पर गंदगी का साम्राज्य है। आवारा कुत्तों की भीड़ और दुर्गन्ध यहां नारकीय स्थिति पैदा कर रही है। पानी के तीनों ओर बसी आबादी बदतर जीवन जीने को मजबूर है। 

यहां एकत्र पानी की निकासी की मांग पिछले अंक में उठी तो उसके बाद बीते शुक्रवार को पालिका की ओर से जल निकासी के लिए एक डीजल पम्पसेट लगाया गया। पाइप लाइन द्वारा पानी को रेलवे लाइन पर स्थित तालाब में डाला जा रहा है। इसके द्वारा यहां जमा होने की रफ्तार से एक चौथाई पानी भी नहीं निकाला जा रहा। ऐसे में पानी घटने के बजाय बढ़ रहा है। पालिका प्रशासन का जलनिकासी का यह करिश्माई तरीका केवल पालिका का खर्च बढ़ाने के अलावा कुछ नहीं। 

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पम्प पर दो कर्मचारी नियुक्त हैं जो दिन में पांच-पांच घंटे रहते हैं। सुबह आठ बजे से शाम छह बजे तक इंजन चलता है। सुबह को रोजाना पम्प लगाया जाता है और शाम को खोलकर थाना चौक स्थित पानी की टंकी के पास ले जाया जाता है। लाने ले जाने में ट्रैक्टर-ट्रॉली का उपयोग किया जाता है। यानी इसमें भी प्रतिदिन डीजल खर्च होता है। यह जानकारी मौके पर मौजूद इंजन ऑपरेटर सुन्दर और विपिन ने दी। 

यहां का जलभराव सूखे के दौरान है। बरसात शुरु होने जा रही है। उस समय यह तालाब मोहल्ले के घरों तक भी आ सकता है। पुरानी बस्ती से लेकर कई मोहल्लों का पानी इधर ही आता है। यहां इतना पानी भरेगा कि उसे आधा दर्जन पम्प सैट भी नहीं निकाल पायेंगे।

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सभासद चाहते हैं जल निकासी का स्थायी समाधान

इस जल भराव का मुद्दा केवल इस मोहल्ले के लोगों ने ही नहीं उठाया बल्कि दूसरे वार्डों के कई सभासदों जिनमें तेजपाल सिंह, अमरीक सिंह डब्बू, मुनरी देवी तथा धर्मेन्द्र आदि ने भी उठाया है। इसी के साथ इन लोगों ने अपने-अपने मोहल्लों की दिक्कतों को इ.ओ. के सामने रखा है। इन सभी का कहना है कि पम्पसैट से जल निकासी नहीं हो सकती। बरसात में बुरा हाल हो जायेगा। गंदा पानी घरों तक आ सकता है। सभासदों का सुझाव है कि जमा पानी के पास से फाजलपुर फाटक तक नाला बनाकर यह पानी वहां से गुजर रहे नाले में डाला जाये। यही जल निकासी का स्थायी और सरल उपाय है। यह उसी समय होना चाहिए था जिस समय रेलवे ने पानी रोका। अब बरसात सिर पर है। अतः इस बार पानी भरना ही है। पालिका की लापरवाही का खामियाजा नगर के बेकसूर नागरिक भुगतने को मजबूर हैं जबकि पालिका प्रशासन इंजन चलाकर बिल बनाने की राह पर चल पड़ा है।

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रेलवे ने सैकड़ों साल पुरानी जल निकासी बंद की

दरअसल पुरानी गजरौला बस्ती का तमाम पानी यहां रेलवे लाइन के नीचे बनी पुलिया के रास्ते दूसरी ओर तालाब में चला जाता था। पिछले दिनों रेलवे ने यहां आवश्यक रुप से पुलिया को यू आकार के अण्डरपास में तब्दील कर दिया। इससे पानी निकासी बंद हो गयी और यह अण्डरपास किसी काम नहीं आ रहा। क्योंकि रेलवे लाइन को पार करने वाली सड़क पर फाटक है। जहां से वाहन सीधे निकल जाते हैं। वैसे भी सैकड़ों साल पुराने जल निकासी के साधन को अकारण बंद करने का कोई औचित्य नहीं। पुलिया के नवनिर्माण से अण्डरपास के निर्माण में रेलवे ने कई गुना धन खर्च किया है। जिससे किसी का भी हित साधन नहीं हुआ।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.