पिछड़े गांवों की टीस खींच लायी देहरादून से गांव तक

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क्षेत्र के गांवों की तस्वीर और तकदीर बदलने में जुटे हैं मनीष.

जनपद का गंगेश्वरी ब्लॉक जनपद के सभी क्षेत्रों से विकास में पिछड़ा है। यहां के रहरा निवासी जागरुक नवयुवक मनीष ने जब अपने क्षेत्र के गांवों की हालत का घूम-घूमकर जायजा लिया तो उन्होंने गांवों की तस्वीर बदलने और विकास में विकासशील क्षेत्रों से होड़ की तैयारी शुरु कर दी।

कोरोना की दस्तक से उपजी परिस्थितियों की वजह से यहां के लोगों के जीवन पर और भी कुप्रभाव पड़ा है। यहां के युवा भारी संख्या में दूरदराज के क्षेत्रों तथा नगरों में मेहनत-मजदूरी कर परिवारों का भरण-पोषण कर रहे थे। इसके पीछे कृषि भूमि की कमी और रोजगार के दूसरे साधनों का अभाव प्रमुख कारण है। यहां उच्च तथा रोजगार परक शिक्षण संस्थायें भी नहीं है। गरीब ग्रामीण दूर क्षेत्रों में महंगी शिक्षा ग्रहण न कर पाने से अशिक्षित हैं।

मनीष का मानना है कि उनके क्षेत्र के पिछड़ेपन के पीछे यहां के नेताओं और सरकारी मशीनरी में व्याप्त भ्रष्टाचार है। ऐसा नहीं कि क्षेत्र में राज्य या केन्द्र सरकारों से कभी विकास कार्यों को धन नहीं आया। यहां भी बहुत सी योजनाओं को धन आया लेकिन यहां कहीं भी जमीनी स्तर पर विकास के दर्शन नहीं होते। लोगों में व्याप्त अशिक्षा, गरीबी और जानकारी के अभाव के कारण नेताओं, अधिकारियों तथा दलालों ने दोनों हाथों से यहां लूट-खसोट की। टूटी सड़कें, शुद्ध पेयजल का अभाव, शिक्षण संस्थाओं और अस्पतालों का न होना, इस इलाके की बदकिस्मती के सच्चे प्रमाण हैं।
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मनीष स्वयं देहरादून में स्नातक की शिक्षा के अंतिम चरण में हैं। समय-समय पर वे अपने क्षेत्र में लोगों के बीच गांवों में पहुंच रहे हैं तथा उनके दर्द की दवा की तलाश में हैं। रोग और उसके निदान की तैयारी भी कर चुके।

मनीष ने बताया कि गंगेश्वरी क्षेत्र में रहरा-गवां सड़क मार्ग पर कई हजार बीघा सरकारी भूमि है जहां अधिकांश बबूल के पेड़ हैं। वे चाहते हैं कि सरकार इस भूमि पर उद्योग स्थापित कर दे तो क्षेत्र के लोगों को प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों तरह से रोजगार मिलेगा। साथ ही तकनीकी संस्थान भी खोला जाए। इसके लिए उन्होंने राज्य और केन्द्र सरकार को पत्र ​लिखने की तैयारी की है तथा क्षेत्र के नवयुवकों को एकजुट करके वे रोजगार सृजन की व्यापक तैयारियों में लगेंगे। इस योजना की जानकारी उन्होंने गांवों के भ्रमण के दौरान वहां जनसभाओं में दी है जिसे लोगों का समर्थन हासिल हुआ है। लोग चाहते हैं कि उनके उचित रोजगार का प्रबंध हो जाए तो उनकी भावी पीढ़ियां अपने आप विकास की ओर चल पड़ेंगी।

मनीष ने गांव-गांव जाकर अपने युवा साथियों के साथ लोगों में मास्क और सैनिटाइज़र का वितरण किया और लोगों को कोरोना से बचाव के उपाय भी बताये। कोरोना से जहां हजारों लोग बेरोजगार हुए हैं वहीं दुग्ध व्यवसाय पर भी बुरा प्रभाव पड़ा है। शहरों में जहां उपभोक्ताओं को फुल क्रीम दूध 54 रुपए लीटर मिल रहा है वहीं यहां दूध को मात्र 18 से 20 रुपए लीटर पर देना पड़ रहा है। ऐसे में कृषि और दुग्ध व्यवसाय घाटे का सौदा हो गया है।

मनीष का कहना है कि यहां शिक्षण संस्थाओं, स्वास्थ्य सेवाओं तथा उद्योगों का भले ही नामोनिशान न हो लेकिन शराब की दुकानों की कमी नहीं। सरकार ने थोड़ी-थोड़ी दूरी पर शराब के ठेके खोल दिए हैं। जिससे पहले से निर्धन और बेरोजगार आबादी को बरबाद कर राजस्व कमाने का काम हो रहा है। कई जगह अवैध रुप से कच्ची शराब का धंधा भी चल रहा है। इस स्थिति से मनीष बहुत व्यथित हैं लेकिन हताश नहीं, वे जहां भी गांवों के लोगों की सभाओं में बोलते हैं तो नशे की लत को विकास में सबसे बड़ी बांधा कहकर उससे पीछा छुड़ाने का आहवान करते हैं।

गरीबी, पिछड़ापन, आपसी झगड़े और गृहक्लेश जैसी समस्याओं के पीछे वे नशाखोरी को बड़ा कारण मानते हैं। ऐसे में उनका अधिक जोर नवयुवकों को नशे की ओर प्रवृत्त होने से रोकना है। उनका दावा है कि यदि नशे की ओर बढ़ते पहले कदम पर ही विराम लग जायेगा तो नयी पीढ़ी में नशे का संक्रमण ही नहीं होगा। जो लोग इसके आदी हो गये हैं, उनको राह पर लाना कठिन ही नहीं बल्कि नामुमकिन है। बल्कि इससे नशेड़ी विद्रोह पर उतारु होकर परिवार और समाज के लिए बड़ा खतरा बन सकते हैं। इसलिए यही तरीका ठीक है कि नयी पीढ़ी को इससे बचाकर, उसे रचनात्मकता की ओर प्रेरित किया जाए।

मनीष का कहना है कि वे नवयुवकों की अलग बैठकें लेकर उन्हें सभी तरह के नशों यथा तम्बाकू, अफीम, शराब तथा भांग आदि के खतरों से अवगत कराकर उनसे दूरी बनाये रखने का आहवान करते हैं। उनके इर्दगिर्द रहने वाले नशाखोरी के शिकार बरबाद लोगों की हालत को देखकर युवा नशे से नफरत करने लगे हैं।

मनीष का कहना है कि हालांकि वे चार-पांच माह से ही लोगों के बीच पहुंच रहे हैं लेकिन जिस तरह लोग खासकर नवयुवक उनके साथ जुड़ रहे हैं, उससे लगता है कि यहां की युवा पीढ़ी जल्दी ही क्षेत्र को विकास की राह तक लाने में सफल होगी।

मनीष राज्य और केन्द्र सरकार तक अपने क्षेत्र के लोगों की आवाज़ बुलंद करते रहेंगे। यहां के युवाओं को एकजुट कर वे क्षेत्र की मजबूत पैरवी करेंगे। उनका मानना है कि हमें नेताओं और अधिकारियों के भरोसे न रहकर अपनी माटी के लिए स्वयं जूझना पड़ेगा।

-टाइम्स न्यूज़ गंगेश्वरी.