प्रदूषण जांच, फिर वही दिल लेकर आए जांच अधिकारी

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जांचकर्ता के कथन से ही स्पष्ट है कि टीम ने टेवा को प्रदूषण मुक्ति का प्रमाण पत्र देने की तैयारी कर ली है

बीते रविवार की रात में नगर की दवा कंपनी टेवा एपीआई से हुए गैस रिसाव को जांचकर्ताओं द्वारा नकाराने की आशंका है। जांच के नाम पर लीपापोती की आशंका से इंकार नहीं किया जा सकता। जांचकर्ता टीम के प्रमुख अनुज शर्मा का कहना है कि फैक्ट्री के आसपास किसी कबाड़ी द्वारा स्क्रैप जलाने से प्रदूषण हुआ। शर्मा के कथन से ही स्पष्ट हो जाता है कि जांच टीम ने टेवा को प्रदूषण मुक्ति का प्रमाण पत्र देने की तैयारी कर ली है।

उधर शिकायकर्ता अग्निशमन अधिकारी घटना के दौरान स्वयं फैक्ट्री गये थे। जहां उन्हें घुसने नहीं दिया गया। यदि फैक्ट्री में सब कुछ ठीक था तो उन्हें अंदर जाने देने में टेवा के अधिकारियों को क्या आपत्ति थी? एफएसओ के अनुसार उन्होंने जब फाटक तोड़कर अंदर घुसने की चेतावनी दी तो फाटक खोले गये। अधिकारी के मुताबिक कंपनी के एचसीएल टैंक से गैस रिसाव हो रहा था। उन्होंने उसकी वीडियोग्राफी भी की, जो उनके पास सुरक्षित है। इसके बावजूद यहां पहुंचते ही अनुज शर्मा का यह कहना कि प्रदूषण फैक्ट्री के बजाय कबाड़ी के कबाड़ से हुआ है, दाल में काले का स्पष्ट संकेत है।


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जांच के दायरे में टेवा के सभी प्लांट और उनके रख रखाव आदि को तो लिया ही जाए साथ ही नगर के उन मोहल्लावासियों से भी जानकारी जुटाई जानी चाहिए जो तिगरिया भूड़, फाजलपुर, विजय नगर, अतरपुरा, मायापुरी, चौहानपुरी, बस्ती और थाना चौक जैसे मोहल्लों में रहते हैं। यहां के चिकित्सक तथा प्रमुख समाजसेवी और पत्रकार भी सही जानकारी देंगे। लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि यहां जब भी प्रदूषण प्रसार की कोई भी घटना हुई तो उसकी जांच प्रशासन और संबंधित वि​भागीय अधिकारी केवल कारखाना प्रबंधकों से बात करके ही संपन्न कर लेते हैं। इस बार भी यही दोहराये जाने की उम्मीद है। अनुज शर्मा के बयान से इसका प्रमाण भी मिल गया।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.