टेवा से जारी प्रदूषण से फैल रहे घातक रोग- हृदयघात, शुगर, कैंसर तथा चर्म रोगियों की बढ़ रही संख्या

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कैमिकल तथा दवा कंपनियों के विशेषज्ञ मानते हैं कि टेवा जैसी इकाई खामोश प्रदूषण लगातार प्रवाहित करती है.

हम पिछले वर्षों में चिकित्सकों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक लिख चुके हैं कि यहां स्थित इज़राइली दवा कंपनी टेवा एपीआई लि. से वायु प्रदूषण होता है जो स्वास्थ्य के प्रति घातक है। यहां से यदा-कदा होने वाले गैस रिसाव से फैक्ट्री के निकट बसी आबादी में कई खतरनाक बीमारियों के मरीज़ों की संख्या लगातार बढ़ी है।

यहां यहा बताना जरुरी है कि गजरौला में स्थित कई फैक्ट्रियां प्रदूषण वाहक बनी हैं। केवल जुबिलेंट को छोड़ बाकी का सभी लोगों को पता नहीं। रविवार की रात नौ बजे टेवा से हुए रिसाव से परेशान लोग भी यही समझ रहे थे कि जुबिलेंट से रिसाव हो रहा है। कई लोगों ने उसी के अधिकारियों को फोन भी किया। वहां ऐसा कुछ था नहीं, लिहाजा कई लोगों ने फायर स्टेशन से संपर्क किया, तब पता चला कि रिसाव टेवा से हो रहा है। कुछ लोगों ने दूसरे सूत्रों से भी पता किया। यह गंध अधिक दुर्गंधपूर्ण और दम-घोंटू जैसी थी। ऐसे में लोगों का घबराना स्वाभाविक था।

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टेवा के निकट स्थित मोहल्ला विजय नगर में हृदयघात से एक साल में कई मौतें हुई जिनमें इस्माइल मलिक नामक व्यक्ति पचास साल और नैपाल सिंह तथा सतनाम सिंह साठ साल के करीब थे। एक माह पूर्व चालीस साल के युवा बिजली मैकेनिक की भी अचानक मौत हो गयी। ऐसे कई लोग हैं जिनकी हार्ट सर्जरी हो चुकी और पैनक्रियाज़ तथा फेफड़ों संबंधी मरीजों की खासी तादाद है। फाजलपुर तथा तिगरिया में पता किया जाए तो प्रदूषण की गिरफ्त में आकर मरने वालों की बड़ी तादाद निकलेगी। चिकित्सक डॉ. श्याम सिंह, डॉ. बीएस जिंदल, डॉ. योगिन्दर सिंह और डॉ. अजय कुमार पैसल आदि का कहना है कि जिस तरह की दवाओं और उनका रॉ मैटीरियल टेवा जैसी कंपनियां इस्तेमाल कर रही हैं, उनके प्लांटों से प्रदूषित गैसों का निकलना कोई नई बात नहीं। असावधानीवश कई बार प्लांटों से खतरनाक गैसों का रिसाव अलग बात है। 


तकनीकी विशेषज्ञों कुलवीर सिंह तथा त्रिलोक राठौड़ का कहना है कि कई बार टैंकों में गैस का दवाब बढ़ने से उन्हें निकालना मजबूरी होता है। चाहें उसका निकटवर्ती आबादी पर कैसा भी दुष्प्रभाव हो। यदि रिसाव नहीं किया जायेगा तो उससे टैंक फट सकते हैं, जिससे बहुत ही भयंकर दुघर्टना हो सकती है। उससे संभावित क्षति का आकलन करने मात्र से परेशानी होती है।

चिकित्सा विशेषज्ञों के साथ कैमिकल तथा दवा कंपनियों के तकनीकी विशेषज्ञ मानते हैं कि टेवा जैसी इकाई खामोश प्रदूषण लगातार प्रवाहित करती है जो वायु द्वारा हमारे शरीर में प्रवेश कर लगातार नुक्सान पहुंचाती रहती है।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.