हमारी लापरवाही कोरोना को निमंत्रण दे रही है

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बाजारों में लोग भीड़ का हिस्सा बन रहे हैं तथा सोशल डिस्टेंसिंग को पूरी तह नजरअंदाज कर रहे हैं.

जिस प्रकार से देश में कोरोना का संक्रमण तेजी पर है और जांच की रफ्तार उससे बहुत धीमी है, यह स्थिति निकट भविष्य की भयावहता का ठोस सूचक है। जब तक कोई वैक्सीन नहीं बन जाती तब तक इसके प्रसार को काबू करना नामुमकिन है। हमारे यहां जांच की धीमी शुरुआत ने खेल बिगाड़ा है। आज संक्रमण में हमारा देश तीसरे स्थान पर है, जिसके जल्दी ही पहले स्थान पर पहुंचने के संकेत मिल रहे हैं। 

अनलॉक-2 में लगभग सभी काम-काज खुल गये थे। अंतर्राष्ट्रीय उड़ाने और अन्तर्राज्यीय यातायात पूरी तरह नहीं खुला। बाजारों में कहीं-कहीं भीड़ है। भले ही व्यापारियों की दुकानों पर अधिक भीड़ न हो, शहरों की सड़कों पर लोग काफी दिखाई दे रहे हैं। छोटे शहरों और कस्बों में भीड़ ज्यादा है। सरकार और प्रशासन लोगों से मास्क के प्रयोग तथा सोशल डिस्टेंस बनाए रखने का प्रचार खूब कर रहे हैं। 

इसके खिलाफ देखने में आया है कि ऐसे लोगों की संख्या बहुत है जो मास्क का प्रयोग नहीं कर रहे तथा सड़कों पर खुलेआम बेधड़क पैदल और बाइक-रिक्शा आदि पर घूम रहे हैं। कई दुकानदार भी बिना मास्क दुकानों पर काम कर रहे हैं, ग्राहकों से बात कर रहे हैं। पुलिस भी लगता है, इस ओर अब कम ही ध्यान दे रही है। इक्का-दुक्का लोगों पर जुर्माना ठोक बाकी से बैर लेना उचित नहीं समझ रही। 

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बाजारों में लोग भीड़ का हिस्सा बन रहे हैं तथा सोशल डिस्टेंसिंग को पूरी तह नजरअंदाज कर स्वयं और दूसरों को खतरों में डाल रहे हैं। यही वजह है कि लॉकडाउन में ढील के साथ ही लोग लापरवाह हो गये, यही लापरवाही कोरोना से लड़ाई में हमें कमजोर कर रही है। बड़े शहरों से छोटे शहरों, कस्बों तथा अब देश के गांवों में भी संक्रमण पैर पसार चुका। जांच जिस गति से जारी है इससे तो देश के 135 करोड़ लोगों की जांच में वर्षों लग जायेंगे। 23 करोड़ की आबादी वाले उत्तर प्रदेश में जांच बहुत ही धीमी है। इससे आनेवाले दिन यहां और भी कठिन होने वाले हैं।

अब उत्तर प्रदेश में सप्ताह में दो दिन लॉकडाउन लगाया जायेगा। इससे माना जा रहा है कि कोरोना की रोकथाम में कुछ मदद मिल सकती है।

-हरमिंदर चाहल.