'कोई भी सरकार किसान हितैषी नहीं' -रामपाल सिंह

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'जब तक किसान और मजदूरों को न्याय नहीं मिलता, तब तक भाकियू संघर्ष जारी रखेगी'

भारतीय किसान यूनियन (अराजनैतिक) के नये जिलाध्यक्ष चौ. रामपाल सिंह न तो केन्द्र और न ही राज्य की सरकार से संतुष्ट हैं। उनका कहना है कि किसान और मजदूरों के हितों में कोई भी सरकार खरी नहीं उतरी। जिलाध्यक्ष बनने पर चौ. रामपाल सिंह ने गजरौला टाइम्स प्रतिनिधि नैपाल सिंह से बात करते हुए अपने ये उद्गार व्यक्त किए।

भाकियू जिलाध्यक्ष से जब पूछा गया कि ऐसा लगता है कि भाकियू के हुक्के की गुड़गुड़ाहट कहीं खो गई है। ऐसा क्यों? उन्होंने इसे नकारते हुए कहा कि ऐसा नहीं। चौ. टिकैत के संगठन की आवाज़ दबने वाली नहीं। सरकार भूल में है, किसान और मजदूर इस देश की आत्मा हैं। उन्हें इस वर्ग को महत्व देना पड़ेगा। ये वर्ग चाहें तो सरकारों को वहीं ले जाकर छोड़ेंगे जहां से वे आयी थीं।

प्रदेश सरकार के काम की संतुष्टि के सवाल पर किसान नेता थोड़े गभीर हुए और कहा कि केन्द्र में मोदीजी की सरकार को सात साल हो गये। इस दौरान किसान और मजदूरों की हालत बद से बदतर हो गयी, ये वर्ग बरबादी के कगार पर है। उन्होंने कहा कि देश कोरोना की महामारी का सामना कर रहा है। इससे किसी को इंकार नहीं लेकिन सरकार ने ऐसा कुछ नहीं किया जिससे किसान को राहत मिल सके। उन्होंने सुझाव दिया कि सरकार को बहानेबाजी के बजाय इस वर्ग की सुनवाई करनी चाहिए।

पीएम किसान सम्मान निधि और गन्ना भुगतान के बारे में पूछने पर जिलाध्यक्ष ने कहा कि सम्मान निधि से अधिकांश किसान वंचित हैं जबकि ढाई महीने बाद भी गन्ना भुगतान नहीं हुआ। इसी से सरकार की किसानों से हमदर्दी की पोल खुलती है।

भाकियू नेता से पूछा गया कि यह लड़ाई कब तक जारी रहेगी? किसान नेता का जवाब था कि जब तक किसान और मजदूरों को न्याय नहीं मिलता, तब तक भाकियू (अराजनैतिक) संघर्ष जारी रखेगी। किसान कोरोना महामारी के कारण थोड़ा खामोश हैं, उसके बाद आंदोलन को गति प्रदान की जायेगी। ऐसा नहीं लगता कि बिना आंदोलन के बात बन सकेगी। सरकार सब जानती है, उसे ऐसा होने से पहले ही किसानों को न्याय दिलाने के कदम उठाने चाहिए।

चौ. रामपाल सिंह ने यह माना कि किसानों के कई अलग-अलग संगठन बनने से किसान एकता प्रभावित हुई है लेकिन यह मानना पड़ेगा कि बाबा टिकैत द्वारा स्थापित भाकियू संगठन ही एकमात्र किसान संगठन है जिसने हमेशा किसान मजदूरों की लड़ाई ईमानदारी और मजबूती से लड़ी है। यह जज़्बा जारी है।

-टाइम्स न्यूज़ रजबपुर.