अमरोहा गंगा खादर क्षेत्र का हाल : जलस्तर बढ़ते ही दिल की धड़कनें बढ़ जाती है खादर वासियों की

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दो दर्जन से अधिक खादर क्षेत्र के गांवों में बाढ़ जैसी स्थिति है.

तहसील धनौरा में गंगा के खादर में बसे दो दर्जन से अधिक गांव प्रतिवर्ष की तरह इस बार भी बाढ़ जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं। मीडिया की सुर्खियों में छाए इन गांवों की आबादी का दर्द कम करने की शासन और प्रशासन के जिम्मेदारों को कोई चिंता नहीं है। चंद अफसर ट्रैक्टर और नाव की सवारी कर के निरीक्षण के बहाने दूर तक फैले गंगा और रामगंगा पोषक नहर के पानी का आनंद लेकर लौटे हैं। लोगों से मिलकर आश्वासन देकर वापस आ गए। यही सिलसिला यहां दशकों से जारी है। लोग बारिश होते ही और बिजनौर बैराज से छोड़े जल से गंगा में आते उफान से भयभीत होकर ऊपर वाले से सुरक्षा की प्रार्थना करते हुए समय गुजारते हैं। पूरी बरसात जल का उतार-चढ़ाव इन लोगों का रक्तचाप भी अपनी तरह घटाता-बढ़ाता रहता है।

ओसीता जगदेपुर, दारानगर, शीशों वाली, जाटोवाली, मीरा वाली, लठीरा, मंदिरों वाली, शाहजहांपुर आदि दो दर्जन से भी अधिक गांव गंगा तटवर्ती क्षेत्र में ऐसी जगह आबाद हैं जहां दूर तक गंगा का पानी भर जाता है। बरसात में अब पूरा इलाका पानी से लबालब हो जाता है। गांव में भराव डालकर ऊंची जगहों पर पशु बांधने, भूसे और उपले रखने की व्यवस्था की गई है। अधिक जलभराव से कई जगह ऐसे स्थान भी जलभराव की चपेट में आ जाते हैं जिससे पशुओं के चारे और भोजन के लिए ईंधन की समस्या विकराल रूप ले लेती है। बहुत से लोगों ने बरसात से पहले ही अपने कई पशु सस्ते में ही बेच दिए।

भय के कारण कई लोग महिला और बच्चों को मकानों की छतों पर भेज देते हैं। जहां अस्थाई छप्परों आदि में बरसात की रात काटने को मजबूर होते हैं। तेज बरसात में लोग रात में जागकर काटने को मजबूर हैं। 

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राजस्व सब के बराबर अदा करने के बावजूद सुविधाएं बिल्कुल नहीं

रामगंगा पोषक नहर पर पुल के अभाव में बरसात में संकटों से जूझ रहे हजारों परिवार सरकारी तथा गैर सरकारी चिकित्सालयों के अभाव में उचित चिकित्सा के भी मोहताज हैं। दूसरे क्षेत्र के लोगों की तरह क्षेत्र के लोग भी सभी तरह के प्रत्यक्ष तथा अप्रत्यक्ष कर अदा करते हैं। यह लोग भी बाजारों से खरीदे उन सभी सामानों पर कर अदा करते हैं जिनपर दूसरे उपभोक्ता अदा करते हैं। ऐसे में लोगों को स्वास्थ्य, बिजली, शुद्ध पेयजल, शिक्षा और आवागमन को एक पुल तक उपलब्ध ना कराना इनके साथ सबसे बड़ा भेदभाव है।

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बरसात में यदि कोई मरीज गंभीर अवस्था में हो तथा किसी स्त्री को प्रसूति में दिक्कत हो तो यहां के लोगों और उनके मरीजों पर क्या बीतती होगी? मजबूरी में दर्द से तड़पते ऐसे मरीजों के लिए यहां मौजूद झोलाछाप चिकित्सक ही बड़ा सहारा होते हैं। किसी तरह दर्द से राहत पाकर मरीजों को नाव के सहारे चकनवाला तक पहुंचाया जाता है जहां से गजरौला तथा धनौरा या मेरठ या मुरादाबाद का मार्ग खुलता है। सवाल फिर वही, आखिर चकनवाला से दूसरे शहरों तक कैसे पहुंचते होंगे। किसी सवारी का यहां कोई प्रबंध नहीं। किराए की टैक्सी भी दुर्लभ है। पर गरीब उसका किराया कैसे चुकाए?

सबसे सस्ता और सबसे सुलभ गांव का झोलाछाप ही पड़ता है। यदि ऐसी डॉक्टर गांव में न हो तो बुखार, खांसी, जुकाम, पेट दर्द, चोट आदि के मरीजों के सामने बहुत बड़ी जटिल समस्याएं खड़ी हो जाएं। लोगों की मांग सरकारी चिकित्सालय की है जहां जरूरी दवाएं और चिकित्सक उपलब्ध हो। 

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.