मीटर चोरी से मीटर निर्माता और बिजली वालों को लाभ

electricity-meter-gajraula

मीटर निर्माता और बिजली वालों के अलावा इस तरह की चोरी में अन्य का शामिल होना समझ से परे है.

जिस प्रकार घरों के बाहर बिजली मीटर लगाये गये हैं। वे सुरक्षा के लिहाज से बिल्कुल भी ठीक नहीं। सुनसान सड़कों के किनारे  दीवारों पर चिपके गली-मोहल्लों में चोर इन्हें आसानी से निशाना बना सकते हैं। हालांकि ये चोरों के किसी काम के नहीं। न इन्हें बेचा जा सकता है, न इन्हें दूसरी जगह इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे केवल उपभोक्ता को परेशान किया जा सकता है, साथ ही उसे आर्थिक नुक्सान भी पहुंचाया जा सकता है। काम करने का बिजली विभाग के अफसरों का आजकल जो रवैया है, उसे देखते हुए मीटर चोरी से उन्हें लाभ हो सकता है।

जिन लोगों के बिजली मीटर चोरी हुए हैं उनके अनुसार वे दोबारा मीटर लगवाने के लिए एसडीओ तथा एक्सिएन के पास कई-कई चक्कर लगाते रहे हैं। थाने में तहरीर देने की कहानी भी सभी जानते हैं। यहां सबसे पहले चश्मा विक्रेता डॉ. प्रदीप दिवाकर का मीटर चोरी हुआ। उन्हें कई दिन तक धक्के खाने पड़े। बिजली के दूसरे मीटर की कीमत देनी पड़ी तब बड़ी मुश्किल से मीटर लगा। ऐसे कई मामले हैं। इसमें मीटर लगने तक उनकी बिजली बंद रही। उनका कहना है कि एसडीओ कार्यालय में क्लर्क को चाय-पानी के नाम पर कुछ देना भी पड़ा। मीटर लगाने वाले ने दो सौ रुपये शुल्क अलग से लिया। इससे पता चलता है कि मीटर चोरी से जहां उपभोक्ता का खर्च बढ़ता है वहीं बिजली वालों की आय बढ़ती है।

साथ ही मीटर निर्माता कंपनियों के मीटरों की बिक्री भी बढ़ती है। यानी मीटर चोरी से मीटर निर्माता और बिजली वाले लाभ कमा रहे हैं। घरों से बाहर मीटर लगाये जाने की वजह कहीं मीटर निर्माता कंपनियों और बिजली वालों की मिलीभगत तो नहीं?

दूसरी ओर देखें तो चोर ऐसी चोरी क्यों करेगा? जिस सामान को न बेचा जा सके और न अपने ही किसी काम का। पकड़ा गया तो मारपीट और पुलिस केस मुफ्त में और होगा। मीटर निर्माता और बिजली वालों के अलावा इस तरह की चोरी में अन्य किसी तत्व का शामिल होना समझ से परे की बात है।

गजरौला में बिजली मीटर चोरी की घटनायें बढ़ीं

नगर में उपभोक्ताओं के घरों के बाहर लगे बिजली मीटरों की चोरी में तेजी आयी है। इससे उपभोक्ताओं के सामने जटिल समस्या खड़ी हो गई है। उपभोक्ताओं ने बाहर मीटर लगाने से संभावित खतरों को पहले ही बिजली अधिकारियों से बता दिया था लेकिन तानाशाही रवैये के आदी हो चुके विभागीय अधिकारियों ने किसी की भी नहीं सुनी।

जब पिछले दिनों इस तरह की गिनी-चुनी घटनायें हुईं थीं तो इसे बिजली वालों तथा पुलिस ने बहुत ही हल्के में लिया था। बिजली के तत्कालीन जे.इ. ने कहा था कि चोर मीटर का क्या करेगा, वह मुश्किल से कबाड़ में पांच रुपए का भी नहीं बिकेगा? एक दारोगा ने तो यहां तक कह दिया कि रीडिंग में गड़बड़ी करने वाले खुद भी मीटर गायब कर सकते हैं।

इस बार मो. सल्तान नगर निवासी अनिल कुमार, अल्लीपुर निवासी मोहम्मद मुर्तजा, भानपुर निवासी सतपाल सिंह, अवंतिका नगर निवासी कपिल कुमार, चौपला बस स्टैंड के निकट बसे जयपाल चौधरी के घरों के बाहर लगे मीटर चोरी गये हैं। इन लोगों ने थाने में मीटर चोरी की तहरीर दे दी है। पुलिस जांच की बात कह रही है। 

उधर बिजलीघर के जे.इ. साहिब सिंह का कहना है कि इससे पूर्व भी मीटर चोरी की घटनायें हुईं। चोर जेल भेजे गये लेकिन जमानत पर आ गये। 

मीटर चोरी रोकने का एकमात्र रास्ता उन्हें चाहरदीवारी के बाहर के बजाय अंदर लगाना है। बाहर लगे मीटरों को लोगों ने अंदर लगाने की मांग की है।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.