गत वर्ष के गंगा मेले का भुगतान लटका, जिला पंचायत प्रमुख और डीएम की कोशिश नाकाम

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जो लोग मेले के राजकीय होने से खुश हो रहे थे आज वही कह रहे हैं कि इससे तो पुरानी व्यवस्था बेहतर थी.

गंगाधाम तिगरी में प्रत्येक वर्ष कार्तिक पूर्णिमा पर लगने वाले गंगा स्नान मेले के गत वर्ष आयोजन में हुए खर्च के 62 लाख रुपए अभी तक आयोजक जिला पंचायत को नहीं मिले। यह हाल तब है जब 2019 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गंगा मेले को राजकीय मेला घोषित कर वाहवाही बटोरी थी। इस वर्ष के मेले का समय करीब है और शासन ने पिछले साल के खर्च का भी भुगतान नहीं किया। ऐसे में इस बार मेला प्रबंध कैसे होगा? जिला प्रशासन को इसी सवाल का जवाब नहीं मिल रहा। डीएम उमेश मिश्र एक माह पूर्व उक्त धनराशि की मांग के लिए उपसचिव नगर विकास अनुभाग-1 को पत्र भी भेज चुके। भुगतान की बात छोड़िए उनकी चिट्ठी का कोई जवाब तक नहीं मिला।

उधर जिला पंचायत अध्यक्ष सरिता चौधरी और उनके पति भूपेन्द्र सिंह पर ठेकेदार पैसों के लिए लगातार दवाब डाल रहे हैं। मेला आयोजन में 1 करोड़ 39 लाख रुपयों का खर्च आया था। जिसमें से सरकार ने मात्र 40 लाख रुपए ही इनमें मिलाकर जिला पंचायत ने 77 लाख रुपए खर्च कर दिए। अभी 62 लाख रुपए और चाहिए जिसकी मांग सरकार से की गई लेकिन साल बीतने के करीब है और कोई सुनवाई नहीं हो रही। मेले की तैयारी कराने वाले लोग पैसे मांगते-मांगते थक गये।

 सरिता चौधरी का कहना है कि वे मुख्यमंत्री से जल्दी ही इसके लिए संपर्क करेंगी। वे संपर्क करें या नहीं, जब कोरोना काल से पहले ही मेले के दौरान उन्हें शासन से धन नहीं मिला तो अब उसके मिलने की कैसे उम्मीद की जा सकती है।

 जो लोग मेले के राजकीय होने से खुश हो रहे थे आज वही कह रहे हैं कि इससे तो पुरानी व्यवस्था बेहतर थी। जिला पंचायत, जिला प्रशासन, ठेकेदार तथा तमाम मजदूर परेशान हैं। डीएम के पत्र का जवाब न आना शासन की मंशा को स्पष्ट कर रहा है।

-टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.