वार्ड 10 एस.सी. के खाते में नहीं गया तो डॉ. सोरन सिंह बसपा उम्मीदवार होंगे

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वेदपाल और भूपेन्द्र में अभी भाजपा टिकट को खींचतान.

जिला पंचायत के वार्ड 10 से चुनाव की तैयारी में बसपा नेता और शिक्षा के क्षेत्र के दिग्गज डॉ. सोरन सिंह जुट गये हैं। उन्हें पार्टी से हरी झंडी मिल गयी है केवल औपचारिक घोषणा बाकी है। पिछली बार यहां से मौजूदा जिला पंचायत अध्यक्षा सरिता चौधरी विजयी रही थीं। वे बसपा उम्मीदवार के रुप में जीती थीं। बाद में भाजपा में शामिल हो गयी थीं।

वार्ड 10 दलित बाहुल्य है। यहां दलित मतदाता हमेशा निर्णायक रहे हैं। यही वजह है कि यहां से बीते दोनों चुनावों में बसपा उम्मीदवार ही जीते। 2011 में वीरेन्द्र सिंह बसपा उम्मीदवार थे, वे विजयी रहे। 2016 में सरिता चौधरी भी बसपा से ही चुनाव जीतीं। इस बार ये दोनों भाजपा में हैं।

डॉ. सोरन सिंह इसी आधार को मानकर बसपा से मैदान में आना चाहते हैं कि जाट-जाटव समीकरण उन्हें विजयी बनाने को पर्याप्त रहेगा। यहां अकेले जाटव मतदाता करीब नौ हजार बताये जाते हैं। दूसरे नम्बर पर जातीय गणित से जाट हैं। यही वजह यहां से लगातार दो बार बसपा के जाट उम्मीदवारों को जिताने में रही। वैसे पिछली बार जिले में सबसे अधिक बसपा उम्मीदवार जीते थे। प्रदेश में सपा शासन के कारण अधिकांश सदस्य उधर चले गये तो सपा की उम्मीदवार रेनु चौधरी अध्यक्ष बनीं। बाद में भाजपा की सरकार आने से अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सपा अध्यक्ष का तख्ता पलट कर भाजपा की सरिता चौधरी अध्यक्ष बनीं। जिला पंचायत सदस्य सत्ता के साथ आस्था बदलते रहे। आगे भी इस परंपरा के जारी रहने से इंकार नहीं किया जा सकता।

वार्ड दस से भाजपा की उम्मीदवारी के लिए फिलहाल दो चेहरे प्रतिस्पर्धा में हैं। सरिता चौधरी के पति भूपेन्द्र सिंह और वेदपाल सिंह। पार्टी जिसे चाहेगी उसे मैदान में उतारेंगी। पिछली बार वार्ड 10 से दोनों की पत्नियां क्रमशः बसपा और सपा से आमने सामने थीं। जिनमें तबकी बसपा उम्मीदवार सरिता चौधरी विजयी रहीं थीं।

सपा ने अभी पत्ते नहीं खोले। उधर से भी जल्दी ही किसी का नाम सामने आ सकता है। जब सभी उम्मीदवार सामने आयेंगे तभी कुछ अनुमान लगाया जा सकेगा। वैसे वार्ड 10 का चुनाव काफी दिलचस्प और कांटे की टक्कर का रहेगा।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.