हम नहीं बदले तो कोरोना से भी भयंकर महामारियों के लिए तैयार रहें

कोरोना से भी भयंकर महामारियों

विकास की अंधी दौड़ में जिस प्रकार हमने कुदरती सिस्टम को अव्यवस्थित कर दिया है वह संपूर्ण मानव सभ्यता के लिए खतरनाक है.

यह भलीभांति स्पष्ट हो गया है कि इस समय अकेले कोरोना ही नहीं बल्कि उसके साथ ब्लैक फंगस और व्हाइट फंगस जैसी कई भयंकर बीमारियों की जकड़ में आज हम सभी हैं। यह भी हो सकता है कि आगे-आगे कई ऐसी बीमारियां भी फैलनी शुरु हो जाएं जिनकी कल्पना हमारे चिकित्सा विज्ञानियों ने भी न की हो।

लंबे समय से देश-दुनिया के शीर्ष पर्यावरणविद, जंतु विज्ञानी और चिकित्सा तथा स्वास्थ्य पर शोध कर रहे विशेषज्ञ हमें चेतावनी दे रहे हैं कि विकास की अंधी दौड़ में जिस प्रकार हमने कुदरती सिस्टम को अव्यवस्थित कर दिया है वह संपूर्ण मानव सभ्यता के लिए खतरनाक है। अंधाधुंध कीटनाशकों के छिड़काव, रासायनिक खादों तथा हाइब्रिड बीजों से उत्पन्न फल सब्जियों और तमाम कृषि उत्पादों के सेवन ने हमारे शरीर को खोखला और कमजोर कर दिया है। जरुरी तत्वों के साथ शरीर में भोजन और पानी के साथ विषैले पदार्थ पहुंच रहे हैं। इसी के साथ आरामदायक जीवनशैली, मामूली गर्मी-सर्दी से शरीर को बचाए रखने, वायु प्रदूषण के बीच जीवन जीने से शरीर की प्रतिरोधक क्षमत बहुत कमजोर होती जा रही है। विशेषज्ञों के बार-बार चेतावनी और स्वयं की जानकारी के बावजूद हम नहीं समझ रहे ऐसे में बुरे दिनों को हम अपने आप बुलावा देते आ रहे हैं। इसमें सुधार की आगे भी उम्मीद नहीं, यानी हम और भी बुरे दिनों की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। इससे इंकार नहीं किया जा सकता कि हमारी अगली पीढ़ियां और भी बुरा वक्त देखने को बाध्य होंगी। बल्कि हम उसकी स्वयं तैयारी में जुटे हैं।

पिछले दिनों संपन्न पंचायत चुनावों में प्रदेश भर में चुनाव ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण से 16 सौ के करीब शिक्षक और शिक्षा से जुड़े लोग मौत के मुंह में चले गए। ये सभी ऑन-ड्यूटी संक्रमित हुए जिनमें से ज्यादातर बाद में इलाज के समय मौत के मुंह में चले गए। इसे लेकर शिक्षा मंत्री और शिक्षा विभाग के अधिकारी ड्यूटी के दौरान दम तोड़ने वालों को ही मृतक संख्या में शामिल कर रहे थे। वहां से कोरोना लेकर घर पहुंचने वालों को वे चुनावी ड्यूटी की वजह से मृतक मानने को तैयार नहीं थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी इसपर खामोश ही रहे। जब मीडिया में अध्यापकों द्वारा इसे लेकर आक्रोश की खबरें आयीं और शिक्षक संगठनों के तेवर सरकार के रवैये के खिलाफ उग्र हए तब कहीं जाकर उनकी तन्द्रा भंग हुई अथवा उन्हें गलती का अहसास हुआ या अपने दायित्व की जानकारी हुई तब उन्होंने सार्वजनिक बयान जारी किया जिसमें उन्होंने कहा कि ऑन- ड्यूटी संक्रमित शिक्षकों की बाद में हुई मौत को भी ऑन-ड्यूटी मृत्यु माना जाएगा।

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र गजरौला

इस बयान से भी पूरी बात स्पष्ट नहीं हुई। सवाल उठता है कि क्या पंचायत चुनावों से संक्रमित मृतकों को जो इस बयान से पूर्व काल-कवलित हुए उन्हें मुआवजा मिलेगा या नहीं या भविष्य में ऐसा होने पर ही मुआवजा दिया जाएगा। दिल्ली सरकार की तरह प्रदेश में योगी सरकार को कोरोना से मृत लोगों के परिजनों को एकमुश्त सहायता राशि का इंतजाम करना चाहिए। केवल नौकरपेशा लोगों के परिवार की ही नहीं बल्कि राज्य के सभी परिवारों के भरण-पोषण का दायित्व सरकार को वहन करना चाहिए।

बीमारियां आती रहेंगी। उपचार, बचाव और सरकारी सहायता का सिलसिला भी जारी रहेगा, लेकिन आगे इससे भी जरुरी काम की जरुरत है। वैश्विक स्तर पर बढ़ रहे प्रदूषण, प्राकृतिक संसाधनों के अंधाधुंध दोहन, प्रदूषित कचरे के बढ़ते अंबार, पर्यावरण को हो रही क्षति और बढ़ते विकिरण को रोकना या कम करना सबसे जरुरी है। यह नहीं होगा तो नयी-नयी और बेहद घातक तथा लाइलाज बीमारियों के लिए तैयार रहें। हमें बचाने वाला फिर कोई नहीं होगा।

-टाइम्स न्यूज़ लखनऊ.