विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटे सभी दल : जनपद की चारों विधानसभा सीटों पर भाजपा का ग्राफ गिरा

भाजपा का ग्राफ गिरा

अमरोहा जनपद की चारों विधानसभा सीटों पर 2022 के चुनाव में भाजपा को विपक्ष लोहे चने चबाने की स्थिति में है.

पंचायत चुनावों के नतीजे भाजपा की मंशा के अनुरुप न आने से भाजपा नेता निराश हैं और कार्यकर्ता खामोश हैं। जनपद की चार में से तीन सीटों पर 2017 में कब्जा जमाने वाली भाजपा अपनी सीटें बचाए रखने को लेकर चिंतित है। केवल अमरोहा ही क्यों सबसे अधिक सीटों वाले राज्य में सत्ता को बचाए रखने के लिए भाजपा में शीर्ष नेतृत्व से लेकर प्रदेश स्तर तक गंभीर मंथन शुरु हो गया है।

कुछ भी हो अमरोहा जनपद की चारों विधानसभा सीटों पर 2022 के चुनाव में भाजपा को विपक्ष लोहे के चने चबाने की स्थिति में है। जिला पंचायत चुनाव में भाजपा सपा और बसपा के बाद तीसरे स्थान पर चली गयी। यह उसके लिए खतरे की घंटी नहीं तो और क्या संकेत माना जाए? यह और भी मजेदार स्थिति है कि धनौरा विधानसभा सीट पर जिला पंचायत के सभी वार्डों में भाजपा हार गयी जबकि यहां से मौजूदा विधायक राजीव तरारा अमरोहा जनपद की सभी सीटों के मुकाबले रिकार्ड मतों से विजयी हुए थे।

नौगांवा सादात तथा हसनपुर विधानसभा सीटों पर भी पंचायत चुनावों में भाजपा का ग्राफ गिरा है। यह तब हुआ है जब मुख्य विपक्षी दल सपा, बसपा, रालोद और कांग्रेस सभी ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे थे। आप भी मैदान में थी। उसका भी एक उम्मीदवार जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतने में सफल रहा। जिला पंचायत के कुल 27 वार्डों में से भाजपा केवल पांच वार्डों में ही जीत हासिल कर पायी। वह भी तब जबकि राज्य और केन्द्र दोनों जगह उसकी बंपर बहुमत की सरकारें हैं। जिला पंचायत चुनाव में यदि सपा व रालोद भी संयुक्त चुनाव लड़ते तो यह गठबंधन अकेला ही बहुमत के करीब पहुंच सकता था। हो सकता है भाजपा के सत्ता से बाहर करने के लिए इन दोनों दलों में मजबूत गठबंधन हो जाए।

जनपद में किसान संगठनों के कई गुट हैं। भले ही केन्द्र सरकार के द्वारा लाये तीन विवादित कृषि जिलों के खिलाफ वे एकजुट हैं लेकिन पंचायत चुनावों में वे अलग-अलग बिखर गए। एक संगठन रालोद, एक बसपा और एक गुट सपा के पक्ष में भाजपा के खिलाफ थे। इसके बावजूद भाजपा तीसरे नंबर का दल बनकर रह गयी। यदि वे सभी किसान संगठन एकजुट होकर किसी भाजपा विरोधी दल का समर्थन कर दें तो उसे सत्ता प्रदान करने में ​सफल हो सकते हैं। वैसे पंचायत चुनाव में किसानों ने सपा को प्राथमिकता दी। विधानसभा चुनाव में भी किसानों का झुकाव सपा की ओर जाने के संकेत मिल रहे हैं। क्योंकि पंचायत चुनावों के परिणामों से यही आभास हो रहा है। अधिकांश किसानों की धारणा बन चुकी है कि वे भाजपा के खिलाफ जो भी मजबूत दल दिखाई देगा, वे उसे ही समर्थन देंगे।

इस स्थिति से सपा, बसपा, कांग्रेस और रालोद जैसे राजनीतिक दलों के नेता भी अच्छी तरह वाकिफ हैं। मंडी धनौरा विधानसभा सीट से सपा ने पूर्व जिला पंचायत सदस्य आलोक भारती की पत्नी आशा भारती को उम्मीदवार बनाने की तैयारी कर दी है। जिनके नाम की औपचारिक घोषणा होना बाकी है। आशा भारती सहकारी संस्थाओं में निर्वाचित होकर लोकप्रियता हासिल कर चुकी हैं तथा वकालत और राजनीति में सक्रिय आलोक भारती निर्विवाद, लोकप्रिय शख्सियत माने जाते हैं। समाजवादी पार्टी ने सबसे मजबूत उम्मीदवार को धनौरा से मैदान में लाने के लिए सही निर्णय लिया है।

भाजपा यहां से मौजूदा विधायक राजीव तरारा को फिर से मैदान में लाना चाहेगी। हालांकि उनके कार्यकाल में वे जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने में सफल नहीं हुए। फिर भी जन सेवाओं में वे बराबर समय निकाल कर लोगों के बीच उपस्थित रहे हैं। यह नहीं कहा जा सकता कि बसपा से इस बार कौन आएगा, फिर भी ताजा हालात भाजपा के हक में दिखाई नहीं दे रहे।

टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.