जलभराव से शीघ्र मिलेगी मायापुरी वालों को राहत

जलभराव से शीघ्र मिलेगी मायापुरी वालों को राहत

गजरौला पालिका छह सौ मीटर पाइप लाइन में खर्च करेगी बीस लाख रुपए की राशि.

तीन मोहल्लों की बड़ी आबादी के लिए मुसीबत बने जलभराव से जल्दी ही मुक्ति मिलने वाली है। यहां सड़ रहे बीमारी को न्यौता देने वाले पानी की निकासी का स्थायी प्रबंध पालिका बीस लाख रुपए खर्च करके करने जा रही है। पालिका की ओर से बताया गया है कि इसके लिए छह सौ मीटर ह्यूम पाइप बिछाकर पानी को रेलवे लाइप पार बूढ़े बाबा के तालाब में छोड़ने की योजना है। जल निकासी के अभाव में तीनों मोहल्लों का पानी तीन ओर पक्के मकानों से घिरे एक खेत में भरकर सड़ रहा है। साथ ही बासात के समय जलभराव मोहल्लों की आबादी में सड़कों पर घरों के आगे भर कर और भी मुश्किलें उत्पन्न करता है। जलभराव की वजह से सड़कों और नालियों की मरम्मत या निर्माण भी नहीं हो सका। कई जगह से होकर गुजरना कठिन बल्कि कई लोगों के लिए नामुमकिन है।

दो वर्ष पूर्व यहां चौमुण्डा मंदिर के पास रेलवे क्रासिंग के निकट अण्डरपास बनाकर रेलवे ने रेलवे पटरियों के नीचे बनी पक्की पुलिया को बंद कर दिया। उससे इधर का पानी दूसरी ओर जाना बंद हो गया। जल निकासी अवरुद्ध होने से मोहल्लों की नालियों का पानी यहां स्थित पूर्व पालिका सदस्य अनिल कुमार अग्रवाल के खेत में भरने लगा जिससे वषों से उसमें फसल भी नहीं उगाई जा सकी। अग्रवाल ने इसकी कई बार यहां से लखनऊ तक शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पिछले दिनों गजरौला टाइम्स ने जलभराव की खबर को प्रमुखता से छापा तो जल निकासी के लिए पालिका ने एक पम्पिंग सेट लगाया जिसकी क्षमता नालियों से आ रहे पानी से भी बहुत कम थी।

भले ही देर से सही लेकिन पालिका ने लोगों की बड़ी समस्या के निदान का मार्ग निकाला है और दो सप्ताह में काम शुरु कराने का भरोसा दिया है। मायापुरी, अम्बेडकर नगर तथा चौहानपुरी की करीब बीस हजार की आबादी जलभराव से पीड़ित है। सबसे अधिक क्षेत्र मायापुरी का प्रभावित है। कई सड़कों पर गंदगी का यह आलम है कि वहां से लोग गुजरने से भी परहेज करते हैं। करीब डेढ़ एकड़ क्षेत्र में लबालब भरा पानी बुरी तरह सड़ रहा है जिससे लोगों में संक्रामक रोग फैल रहे हैं। बच्चों और महिलाओं में बीमारों की तादाद ज्यादा है। लोग स्वयं भी स्वच्छता के प्रति लापरवाह हैं। पालिका के कदम का स्थानीय लोगों ने यह कहकर स्वागत किया है कि थोड़ी देर से ही सही लेकिन नगर पालिका ने उनकी समस्या के समाधान करने के लिए कदम तो बढ़ाया।

भाजपा नेता भी राहत में

तीन वर्षों से एक एकड़ खेत में नालियों का पानी भरा रहने से भाजपा नेता और पूर्व पालिका सदस्य अनिल कुमार अग्रवाल फसल नहीं उगा सके। उनके खेत में बारहों महीने लबालब पानी भरा रहता है, वो भी नालियों का सड़ा हुआ पानी। यह समस्या रेलवे द्वारा जल निकासी को पुरानी पुलिया बंद करने से पैदा हुई। उससे पहले वे बराबर खेत में फसलें उगाते रहे थे। भाजपा नेता के मुताबिक उन्हें लाखों का नुक्सान हुआ। जिस साल यहां जलभराव शुरु हुआ, उस समय खेत में चने और सरसों की फसल जम कर खड़ी हुई थी।  जलभराव ने उसे शैशवकाल में ही नेस्तनाबूद कर दिया। 

उन्हें इस बात पर नाराजगी है कि नगर, विधानसभा और केन्द्र तक भाजपा की सरकार होते हुए भी सबसे पुराने कार्यकर्ता की सुनवाई नहीं हुई। इसी के साथ इस बात पर वे संतोष भी करते हैं कि जल निकासी का प्रबंध अब होने जा रहा है।

मायापुरी में कई घरों में बिजली भी नहीं

नगर के मायापुरी मोहल्ले के लोगों को न केवल जलभराव की समस्या है, बल्कि कई दूसरी समस्यायें भी हैं जो जलभराव से जुड़ी हैं। इसकी वजह से बिजली के कई खम्भे भी पानी में हैं। जिनकी वजह से बिजली वाले कई घरों में बिजली कनेक्शन नहीं देते। ऐसे करीब सौ घरों में बिजली नहीं पहुंची। लोग पंखे, बल्ब और टी.वी. के मोहताज हैं। इसी के साथ जलभराव के कारण कई जगह सड़कें नहीं बन पायीं। यदि बनी भी हैं तो वे कीचड़-गारे में धंस कर समाप्त हो चुकीं। इससे आवागमन में बड़ी मुसीबत है। जलभराव रहित आबादी में भी टूटी-फूटी सड़कें, अस्त-व्यस्त और कीचड़ से उफनाई नालियां लोगों के लिए मुसीबत बनकर आयी हैं।

जलभराव की समस्या के निदान के बाद लोगों में दूसरी जन-समस्याओं के निदान की उम्मीद भी जगी है जो उसकी वजह से उत्पन्न हुई हैं।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.