हसनपुर सीट पर सपा से राहुल कौशिक का दावा

हसनपुर सीट पर सपा से राहुल कौशिक का दावा

इस लोकसभा क्षेत्र में आसन्न विधानसभा चुनाव की सभी पांचों विधानसभा सीटों के लिए उम्मीदवारी के दावों के लिए नेताओं में प्रतिस्पर्धा शुरु हो गयी है। सपा-रालोद गठबंधन होने से दोनों ही दलों के कई-कई नेता पत्येक सीट पर दावा ठोकते नजर आ रहे हैं। हालांकि अभी यह भी निश्चित नहीं कि पांच में से दोनों दलों को कितनी-कितनी सीटें मिलेंगी? सपा-रालोद गठबंधन के अलावा यहां भाजपा, कांग्रेस और बसपा भी मैदान में होंगी। कई दूसरे दलों के उम्मीदवार भी मैदान में होंगे। 2017 के चुनाव में यहां की पांच में से चार सीटें भाजपा के पास थीं जबकि एक मात्र अमरोहा सदर सीट सपा के कब्जे में थी। इसके बावजूद 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में यहां भाजपा पराजित हुई और यहां बसपा के कुंवर दानिश अली चुनाव जीते। इसके पीछे सपा-बसपा गठबंधन बड़ी वजह था।

इस समय यहां सपा-रालोद गठबंधन और उसे भाकियू के मूक समर्थन के कारण भाजपा के सामने गठबंधन उम्मीदवार जबर्दस्त चुनौती बनेंगे। हसनपुर को छोड़कर शेष चारों सीटों के जातीय समीकरण खतरे की घंटी के संकेत दे रहे हैं। अमरोहा में अभी सपा नेता महबूब अली का कोई विकल्प नहीं है। रालोद से गठबंधन के बाद स्थिति यह है कि वहां भाजपा से उम्मीदवारी के लिए अभी तक कोई भी नाम सामने नहीं आया। कांग्रेस और बसपा की भी यही स्थिति है।

हसनपुर सीट सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव के चहेते पूर्व मंत्री कमाल अख्तर के लिए दी जाती रही है। वे यहां से पिछली बार चुनाव हारे और अपनी पत्नी को लोकसभा चुनाव भी 2014 में नहीं जिता पाए। इस बार वे कहां से लड़ाये जाएंगे, नहीं कहा जा सकता। वे हसनपुर से ही दावेदारी कर रहे हैं। लेकिन सपा के पूर्व दिग्गज, स्व. रमाशंकर कौशिक के बेटे राहुल कौशिक हसनपुर से उम्मीदवारी का दावा ठोक रहे हैं। वे इसके लिए सपा प्रमुख अखिलेश यादव से गंगा स्नान के मौके पर लखनउ जाकर मंत्रणा भी कर चुके हैं। उनके समर्थक मानते हैं कि जनपद की एक सीट किसी हिन्दू को मिलेगी तभी भाजपा के साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण को जवाब दिया जा सकता है। कौशिक समर्थकों का कहना है कि अमरोहा से महबूब अली, नौगांवा से अशफाक अली खां तथा हसनपुर से कमाल अख्तर को उम्मीदवार बनाया जाता है तो यह स्पष्ट संदेश जाएगा कि जिले में सपा-रालोद मिलकर हिन्दू बहुसंख्यकों की उपेक्षा कर मुसलमानों का एकाधिकार थोपना चाहते हैं। यदि हसनपुर की सीट राहुल कौशिक को मिल जाती है तो भाजपा को साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण का मौका नहीं मिलेगा। धनौरा पहले ही आरक्षित है। कौशिक समर्थकों के इस तर्क में दम है। हसनपुर में खड़गवंशी तथा सैनी समाज के मतदाता भारी संख्या में हैं जबकि वैश्य तथा ब्राह्मण हमेशा उनके साथ रहे हैं। ऐसे में यहां से राहुल कौशिक कमाल अख्तर से मजबूत उम्मीदवार सिद्ध होंगे। इस बार नौगांवा सादात और धनौरा विधानसभा सीटों पर भी भाजपा को सपा-रालोद गठबंधन उम्मीदवारों से कड़ी टक्कर मिलने जा रही है।

धनौरा विधायक राजीव तरारा को जहां विपक्ष से लड़ना है वहीं भाजपा के कई क्षेत्रीय क्षत्रप भी उनकी जड़ों में मट्ठा डालने की पूरी कोशिश करेंगे। वैसे भाजपा के जिला संगठन में आंतरिक गुटबंदी नुक्सानदेह है। धनौरा विधायक ने क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन पूरी लग्न और ईमानदारी से किया है लेकिन बेलगाम नौकरशाही और भाजपा शीर्ष नेतृत्व की नीतियों का उन्हें भी खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। इस बार उनकी राह में कई कांटे हैं। यह भी चर्चा है कि नौगांवा विधायक संगीता चौहान और गढ़मुक्तेश्वर विधायक कमल सिंह को इस बार मैदान में नहीं उतारा जाएगा। नए वर्ष के आगमन तक कई तरह की चर्चाएं और कयास जारी रहेंगे। उसके बाद चुनावी दंगल के पहलवानों के चेहरे स्पष्ट होने लगेंगे।

टाइम्स न्यूज़ अमरोहा.