महबूब को चुनौती देंगे बसपा के कामिल पाशा

महबूब को चुनौती देंगे बसपा के कामिल पाशा

जनपद की चारों सीटों में से अमरोहा विधानसभा सीट पर सपा और बसपा दो दलों के उम्मीदवारों का पता चल गया है। सपा से मौजूदा विधायक और पूर्व मंत्री महबूब अली तथा उनके सामने बसपा ने पूर्व विधायक आकिल मुन्ना के बेटे कामिल पाशा को उतारा है। हालांकि अभी पार्टिंयों की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं हुई। दोनों के क्षेत्र में प्रचार और जनसंपर्क से पता चल रहा है कि इनकी उम्मीदवारी पक्की है। भाजपा और कांग्रेस यहां से किसे लड़ाएगी यह नहीं पता। लगता तो यही है कि इन दोनों दलों को यहां के लिए उम्मीदवार ढूंढ़ना पड़ेगा।

अमरोहा सीट जनपद की ऐसी सीट है जहां मुस्लिम मतदाता डेढ़ लाख से भी अधिक हैं। इस समुदाय पर महबूब अली की मजबूत पकड़ है। यही नहीं उन्होंने जाट, सैनी तथा चौहान मतों में भी अपनी जगह बनायी है। इस बार सपा-रालोद गठबंधन की वजह से यहां का प्रमुख किसान समुदाय जाट उनके समर्थन में खड़ा दिख रहा है। इस लिहाज से वे पिछली बार से भी बड़ी बढ़त के साथ जीतने चाहिए। वैसे भी भाजपा की आंधी में भी वे भाजपा को पराजित करने में सफल रहे। जबकि लोकसभा चुनाव में भी कुंवर दानिश अली उन्हीं के विधानसभा क्षेत्र से मिली बढ़त पर जीतने में सफल रहे।

महबूब अली के अपने क्षेत्र में अजेय योद्धा होने के बावजूद उनके सामने कामिल पाशा का मैदान में आना बड़ी बात है। यह नहीं कहा जा सकता कि उनके पास ऐसा कौनसा पासा दांव है जिसके सहारे वे महबूब अली को चित करने की मंशा से मैदान में उतरे हैं। कुल मिलाकर यह मुकाबला बहुत ही दिलचस्प होने वाला है।

यह तो रही सपा-बसपा की बात, अब प्रचण्ड बहुमत से सत्ता पर बैठी भाजपा पर भी विचार किया जाए तो ताजा स्थिति में भाजपा का कोई भी नेता यहां से मैदान में नहीं आना चाहता। ऐसा लगता है अपनी साख बचाने को भाजपा अंतिम सूची में किसी का नाम जरुर लायेगी। वह कौन होगा, नहीं कहा जा सकता?

बसपा सूत्रों से पता चला है कि कई कारणों से तुर्क बिरादरी के नेताओं में महबूब अली से नाराजगी है। कामिल पाशा तुर्क हैं और उनके मरहूम पिता मुन्ना आकिल एक बार विधायक भी रह चुके हैं। यहां सैफी तथा अंसारी मतदाताओं की तरह तुर्क मुसलमानों में बड़ा वर्ग है। हालांकि महबूब अली की बिरादरी मुसलमानों में अल्पसंख्यक है। इसी से पता चलता है कि मुसलमानों पर महबूब अली की पकड़ जातीय आधार पर नहीं बल्कि उनके दूसरे गुणों की वजह से है। यह तो आने वाला समय ही बतायेगा कि परिणाम क्या होंगे? लेकिन पिछले तमाम चुनावों के नतीजों से पता चलता है कि अमरोहा विधानसभा सीट पर यहां महबूब अली की लहर के सामने कोई लहर नहीं टिक सकी।

-टाइम्स न्यूज अमरोहा.