गजरौला को पिछड़ा वर्ग में चाहते थे कई लोकप्रिय नेता

गजरौला को पिछड़ा वर्ग में चाहते थे कई लोकप्रिय नेता

जानकारों का मानना है कि पालिकाध्यक्ष पद जिस वर्ग में घोषित हो चुका अब उसमें तब्दीली की उम्मीद नहीं हालांकि कई लोग उसमें बदलाव का अनुमान जाहिर कर रहे हैं। पिछड़ा वर्ग के कई कार्यकर्ता और नेता मौजूदा आरक्षण से संतुष्ट नहीं हैं बल्कि वे अपने वर्ग के साथ भेदभाव मान रहे हैं। यह सर्वविदित है कि गजरौला में इस समय पिछड़े और अतिपिछड़े वर्ग के लोगों की संख्या सबसे अधिक है। जिसमें लगातार बढ़ोत्तरी समुदाय भी भारी संख्या में हैं। एस.सी., एस.टी. तथा सामान्य वर्ग के लोगों की संख्या बी.सी./ओ.बी.सी. से कम बताई जाती है। सपा के डॉ. जितेन्द्र यादव, बसपा के निरंजन सिंह तथा रालोद के सचिन चौधरी सहित कई नेताओं का कहना है कि 1988 से जितने भी चुनाव हुए हैं सभी में कभी सामान्य और कभी एस.सी. वर्ग में अध्यक्ष पद आया है। पिछड़े वर्ग को कभी भी आरक्षण का लाभ नहीं दिया गया जबकि इस वर्ग की तादाद दूसरों से अधिक है।

भाजपा नेता सुरेन्द्र सिंह औलख, चौ. वीरेन्द्र सिंह तथा उत्तम सिंह प्रजापति, विचित्र भाटी भी चाहते थे कि इस बार गजरौला पिछड़ा वर्ग के खाते में आना चाहिए। यदि ऐसा हुआ होता तो उपरोक्त सभी नेता भी टिकट की दावेदारी ठोक सकते थे। इनमें वीरेन्द्र सिंह सभी वर्गों में लोकप्रिय हैं। वे भाजपा के जिला उपाध्यक्ष हैं और उनकी पत्नी मीनाक्षी चौधरी यहां की ब्लॉक प्रमुख हैं। उधर बसपा में निरंजन सिंह, भाजपा में विचित्र सिंह भाटी और उत्तम सिंह भी जनसेवाओं में समय दे रहे हैं। सपा में डॉ. जितेन्द्र यादव भी अपने व्यवहार से सभी वर्गों में स्वीकार्य नेता हैं।

-टाइम्स न्यूज़ गजरौला.