पिछले वर्षों की भांति हम सभी नव वर्ष 2023 के आगमन पर एक-दूसरे को शुभकामनायें दे रहे हैं तथा नये वर्ष में सुख-शांति की मंगलकामनायें करते हुए प्रगति की उम्मीद कर रहे हैं। ईश्वर नये वर्ष में सभी पर कृपा बनाये रखे। बीता वर्ष हमारे देश के साथ ही विश्व भर में कुछ खट्टे-मीठे अनुभवों के दौर के साथ संपन्न हुआ। कई तरह के उतार-चढ़ाव के दौर से हम सभी को गुजरना पड़ा। कालचक्र का मतलब ही बदलाव से है। संसार में परिवर्तन सतत प्राकृतिक प्रक्रिया है। रात के बाद दिन, दिन के बाद रात, सर्दी के बाद गर्मी और उसके बाद बरसात, फिर वही क्रम जारी रहता है। सुख-दुख भी समय के साथ जारी रहते हैं। समय अपनी चाल जारी रखते हुए आगे बढ़ता रहता है। वह मुड़कर वापस नहीं आता। यही सिलसिला बीते वर्षों का है जो गये फिर लौटकर नहीं आये। ऐसे में हम बेहतरी की कोशिश में भविष्य की ओर भरोसे की राह निहारते हैं। इसीलिए लोग सुखद भविष्य की कामना में नये वर्ष का बार-बार हर्षोल्लास के साथ स्वागत करते हैं। बीते वर्ष के दुख-दर्द और गलतियों की पुनरावृत्ति न होने की उम्मीद करते हैं तथा विश्वास के साथ नये स्वप्नलोक का सृजन कर नए साल में उसके संपूर्ण होने की उम्मीद बांध लेते हैं। नये लक्ष्य तय करके उन्हें पूरा करने के सिलसिले के साथ नये सफर पर निकल पड़ते हैं।
दुनियाभर में तनाव, आपसी प्रतिद्वंदिता, कई तरह की बीमारियों, महामारियों के हमले, बेरोजगारी, आतंकवाद तथा क्षेत्रवाद जैसे खतरे कम नहीं हो पा रहे। हमारा देश हमेशा शांति का पक्षधर रहा है। आज भी हम आपसी भाईचारे तथा विश्वशांति की परंपरा का निर्वहन कर रहे हैं। दुनिया के कई दूसरे देश भी हमारी तरह इस दिशा में प्रयासरत हैं। यही वजह है अशांति के दौर में हालात काबू में हैं।
जलवायु परिवर्तन भी दूसरे प्राकृतिक बदलावों की तरह ही है। इसे खतरनाक स्थिति की ओर ले जाने के लिए आज का असंयमित औद्योगीकरण और इंसान का विलासिता की तरफ बढ़ना मूल कारण है। मशीनीकरण के अधीन केवल शरीर ही नहीं हमारा दिमाग भी होता जा रहा है। शरीर और दिमाग दोनों का काम जब मशीनें करने लगेंगी तो मानव निष्क्रिय पदार्थ का रुप ले लेगा। यह बहुत भयावह स्थिति है। हम सभी को नए साल में इस समस्या के विस्तार को रोकने पर विचार करना होगा। विकासवाद की अंधी दौड़ हमारे अस्तित्व के लिए बड़ा खतरा बनती जा रही है। शरीर और दिमाग को मशीनों का गुलाम बनाने के बजाय उसे आत्मनिर्भर बनाये रखने का व्रत लेना जरुरी है। यही नव वर्ष की मंगलकामना होनी चाहिए।
-जी.एस. चाहल.